कश्मीर के पारंपरिक चावल में है खास जीन, जो बदलती जलवायु से बचा सकते हैं
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चर्चा में क्यों
SKUAST-Kashmir के शोधकर्ताओं ने पहचान की है कि कश्मीर की पारंपरिक चावल की किस्मों में ऐसे विशिष्ट कोल्ड-टॉलरेंस (cold-tolerance) जीन मौजूद हैं जो आधुनिक किस्मों में नहीं पाए जाते हैं। ये जीन जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन (climate-resilient traits) प्रदान करते हैं।
पृष्ठभूमि
'The Plant Genome' में 27 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित एक अध्ययन में SKUAST-Kashmir ने पाया कि पारंपरिक कश्मीरी चावल की किस्में कोरियाई प्रायद्वीप और उत्तर-पूर्वी चीन की किस्मों से काफी मिलती-जुलती हैं। इन किस्मों में स्थानीय रूप से अनुकूलित जीन (genes) मौजूद हैं, जो आधुनिक किस्मों की तुलना में बेहतर ठंड सहने की क्षमता प्रदान करते हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाSKUAST-Kashmir: शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी श्रीनगर में स्थित है।
- तथ्यपारंपरिक कश्मीरी चावल की किस्मों में अद्वितीय कोल्ड-टॉलरेंस (cold-tolerance) और स्थानीय रूप से अनुकूलित जीन (genes) होते हैं।
- तथ्यपारंपरिक कश्मीरी चावल की किस्में जेनेटिकली (genetically) कोरियाई प्रायद्वीप और उत्तर-पूर्व चीन की किस्मों से संबंधित हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: हिमालयी क्षेत्रों में पारंपरिक फसल किस्मों का संरक्षण किस प्रकार जलवायु-अनुकूल कृषि और खाद्य सुरक्षा में योगदान दे सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- जेनेटिक इरोजन: हाई-यील्डिंग आधुनिक किस्मों को अपनाने के कारण स्वदेशी कोल्ड-टॉलरेंस गुणों का नुकसान
- क्लाइमेट अडैप्टेशन: पहाड़ी खेती में तापमान के भारी उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए स्थानीय रूप से अनुकूलित जीन्स का उपयोग
- जैव विविधता संरक्षण: आधुनिक कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देने और आनुवंशिक विविधता को बचाने के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: जलवायु-अनुकूल कृषि · आनुवंशिक विविधता · फसल अनुकूलन · इन-सिटू कंजर्वेशन · जेनेटिक इरोजन
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।