केरल में लेबर कोड पर कमेटी गठित, 10 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
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संघवाद और औद्योगिक संबंध: राज्य-स्तरीय नियम बनाने और ट्रेड यूनियन की भागीदारी पर एक GS3 केस स्टडी।
चर्चा में क्यों
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और श्रम मंत्री बिंधु कृष्ण ने लेबर कोड्स (Labour Codes) के तहत राज्य के नियमों के लिए 10 दिनों के भीतर सिफारिशें प्रस्तुत करने हेतु एक समिति का गठन किया है।
पृष्ठभूमि
इस समिति में सात ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी शामिल हैं। केरल सरकार की योजना केंद्र सरकार से नए लेबर कोड्स (Labour Codes) के लिए श्रमिकों की संख्या की सीमा (worker threshold limits) को कम करने की मांग करने की है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- पदवी.डी. सतीशन: केरल के मुख्यमंत्री।
- पदबिंधु कृष्ण: केरल की लेबर मिनिस्टर।
- तथ्यसमिति का गठन 10 दिनों की समय सीमा के भीतर सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए किया गया था।
- तथ्यसमिति में सात ट्रेड यूनियन (Trade Union) प्रतिनिधि शामिल हैं।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
लेबर कोड्स (Labour Codes) के संबंध में केरल सरकार द्वारा गठित कमेटी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- समिति को 10 दिनों की समय सीमा के भीतर सिफारिशें सौंपने का काम सौंपा गया है।
- समिति में ठीक पांच ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि शामिल हैं।
- राज्य सरकार केंद्र सरकार से वर्कर्स थ्रेशोल्ड लिमिट (worker threshold limits) में कमी की मांग करने की योजना बना रही है।
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)केवल 1 और 2
- (d)केवल 1 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (d) केवल 1 और 3 — कथन 1 और 3 सही हैं। कथन 2 गलत है: इस कमेटी में सात ट्रेड यूनियन (trade union) प्रतिनिधि शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: केंद्रीय श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन में राज्य-स्तरीय नियम-निर्माण के महत्व और श्रमिकों के संरक्षण को सुनिश्चित करने में ट्रेड यूनियनों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संघीय टकराव: केंद्र के विधायी आदेशों और राज्यों की औद्योगिक जरूरतों के बीच संघर्ष
- रेगुलेटरी थ्रेशोल्ड: MSMEs और गिग वर्कर्स के फॉर्मलाइजेशन पर वर्कर काउंट लिमिट का असर
- त्रिपक्षीय परामर्श: औद्योगिक उत्पादकता और श्रम अधिकारों के लिए ट्रेड यूनियन की मांगों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: त्रिपक्षीय परामर्श · संघवाद · लेबर कोड · औद्योगिक संबंध · MSME का फॉर्मलाइजेशन
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।