सत्याधीशसत्याधीश
SatyaDheesh
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
ताज़ा करने के लिए खींचें
भाग I · स्था. 11.2025 
SatyaDheesh
सत्याधीश
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
लाइव

UN में भारत पर मानवाधिकार के नाम पर दबाव बनाने का विरोध

GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· दूसरे देशों की नीतियों का भारत पर असर· मेन्स·

मानवाधिकार कूटनीति और संप्रभु समानता: GS2 अंतर्राष्ट्रीय संबंध और एथिक्स (Ethics) के लिए एक महत्वपूर्ण केस स्टडी।

चर्चा में क्यों

विदेश मंत्रालय (MEA) की उप सचिव बरखा ताम्रकार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत के खिलाफ राजनीतिक दबाव बनाने के लिए मानवाधिकारों के इस्तेमाल का विरोध किया।

पृष्ठभूमि

विदेश मंत्रालय की उप सचिव बरखा ताम्रकार ने 20 अक्टूबर, 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में यह वक्तव्य दिया। यह वक्तव्य जिनेवा में 20 से अधिक UN मानवाधिकार विशेषज्ञों द्वारा नई दिल्ली में युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस की प्रतिक्रिया के संबंध में उठाए गए चिंताओं के जवाब में दिया गया था।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थासंयुक्त राष्ट्र महासभा की थर्ड कमेटी (Third Committee): यह कमेटी मानवाधिकार, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों के लिए जिम्मेदार है।
  • पदबरखा ताम्रकार: विदेश मंत्रालय (MEA) में डिप्टी सेक्रेटरी।
  • तथ्यजेनेवा में 20 से अधिक UN मानवाधिकार विशेषज्ञों ने नई दिल्ली में युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के प्रति पुलिस की प्रतिक्रिया को लेकर चिंता जताई।

प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) की थर्ड कमेटी (Third Committee) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह बयान विदेश मंत्रालय के एक डिप्टी सेक्रेटरी (Deputy Secretary) द्वारा दिया गया था।
  2. जिनेवा में 50 से अधिक UN मानवाधिकार विशेषज्ञों ने विरोध प्रदर्शनों के प्रति पुलिस की प्रतिक्रियाओं को लेकर चिंता जताई।
  3. यह कमेटी मानवाधिकार, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों के लिए जिम्मेदार है।
  1. (a)केवल 2
  2. (b)केवल 1 और 2
  3. (c)केवल 1 और 3
  4. (d)1, 2 और 3
उत्तर देखें

उत्तर: (c) केवल 1 और 3 — कथन 1 और 3 सही हैं। कथन 2 गलत है: नोट में उल्लेख है कि 20 से अधिक UN मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजनयिक जुड़ाव के संदर्भ में, राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों के बीच उत्पन्न होने वाले तनाव का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • संप्रभुता बनाम सार्वभौमिकता: घरेलू पुलिसिंग स्वायत्तता और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारों की जांच के बीच संतुलन
  • डिप्लोमैटिक वेपनिज़ेशन: भू-राजनीतिक दबाव के लिए मानवाधिकारों के ढांचे का इस्तेमाल
  • संस्थागत घर्षण: भारत के आंतरिक सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ UN मानवाधिकार विशेषज्ञ की सिफारिशों का तालमेल

मुख्य शब्द: संप्रभु समानता · मानवाधिकार कूटनीति · भू-राजनीतिक दबाव · आंतरिक सुरक्षा · बहुपक्षवाद

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗

अंतर्राष्ट्रीय संबंध पर और नोट्स

सभी अंतर्राष्ट्रीय संबंध करेंट अफेयर्स →

कोई गलती या कोई कमी?

किसी नोट में गलती दिखे, या तैयारी के लिए कोई टॉपिक, फॉर्मेट या पीडीएफ चाहिए, तो हमें लिखें। हम हर मेल पढ़ते हैं और गलतियाँ जल्दी ठीक करते हैं।

गलती बताएँ →कुछ और चाहिए? बताएँ →[email protected]

यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।