सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने घोषणा की है कि फाइनेंशियल ईयर 2026-27 और उसके
GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंग· प्रीलिम्स·
इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग और फिस्कल पॉलिसी: विदेशी निवेश को आकर्षित करने पर GS3 का एक केस स्टडी।
चर्चा में क्यों
CBDT ने घोषणा की है कि वित्त वर्ष 2026-27 और उसके बाद के लिए महाराजा बॉन्ड (Maharajah Bond) धारकों पर मिलने वाले ब्याज पर कोई टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (TDS) लागू नहीं होगा।
पृष्ठभूमि
CBDT का यह निर्णय निवासी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) दोनों पर लागू होता है। NDB भारत में टिकाऊ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Sustainable Infrastructure Projects) के वित्तपोषण के लिए इन बॉन्ड के माध्यम से पांच वर्षों में ₹25,000 करोड़ जुटाने की अनुमति मांग रहा है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाCBDT: सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (Central Board of Direct Taxes)।
- तथ्यNDB, Maharajah Bonds के जरिए ₹25,000 करोड़ जुटाने की कोशिश कर रहा है।
- तथ्यइंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग के लिए बॉन्ड टेन्योर (Bond tenure) पांच साल से अधिक है।
- तथ्यTDS छूट रेजिडेंट और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (foreign institutional investors) दोनों पर लागू होती है।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
Maharajah Bonds और CBDT की घोषणा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इन बॉन्ड्स का उद्देश्य भारत में नॉन-सस्टेनेबल (non-sustainable) इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड करना है।
- वित्त वर्ष 2026-27 से विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign Institutional Investors) के लिए ब्याज पर TDS लागू होगा।
- NDB इन बॉन्ड्स के जरिए पांच साल की अवधि में ₹25,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखता है।
- (a)केवल 3
- (b)केवल 1 और 3
- (c)केवल 2 और 3
- (d)1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (a) केवल 3 — कथन 3 सही है। कथन 1 गलत है: इन बॉन्ड्स का उद्देश्य सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (sustainable infrastructure projects) को फंड करना है। कथन 2 गलत है: CBDT ने घोषणा की है कि रेजिडेंट और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स दोनों पर TDS लागू नहीं होगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: महाराजा बॉन्ड (Maharajah Bonds) के निर्गमन से भारत के बुनियादी ढांचा लक्ष्यों को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायता मिल सकती है, साथ ही राजकोषीय और मौद्रिक स्थिरता के प्रबंधन में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- फ़िस्कल लेवरेज: इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग की कमी को पूरा करने के लिए सॉवरेन-बैक्ड बॉन्ड्स का इस्तेमाल
- इन्वेस्टर सेंटीमेंट: विदेशी इंस्टीट्यूशनल कैपिटल को आकर्षित करने पर TDS छूट का असर
- कर्ज की स्थिरता: लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर देनदारियों और नेशनल डेट-टू-जीडीपी रेशियो के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: स्रोत पर टैक्स की कटौती · इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग · विदेशी संस्थागत निवेशक · राजकोषीय नीति · सतत विकास
अर्थव्यवस्था पर और नोट्स
- यस बैंक के लिए 8,415 करोड़ के AT1 बॉन्ड्स बने लायबिलिटी, कानूनी विकल्प तलाश रहे · 20 अक्टूबर 2026
- केरल में 5,000 करोड़ के एसेट्स को लिक्विडेट करेगा KSEB · 19 अक्टूबर 2026
- RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया, EMI में 769 रुपये तक का इजाफा संभव · 19 अक्टूबर 2026
- ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की वर्कफोर्स में भारी उछाल, 33% से बढ़कर 45.9% हुई · 19 अक्टूबर 2026
- तमिलनाडु में युवाओं की बेरोजगारी 26% से घटकर 14% हुई · 19 अक्टूबर 2026
- भारत-न्यूजीलैंड FTA के तहत केरलम का पहला एक्सपोर्ट शिपमेंट रवाना · 18 अक्टूबर 2026
कोई गलती या कोई कमी?
किसी नोट में गलती दिखे, या तैयारी के लिए कोई टॉपिक, फॉर्मेट या पीडीएफ चाहिए, तो हमें लिखें। हम हर मेल पढ़ते हैं और गलतियाँ जल्दी ठीक करते हैं।
यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।