2019 के विधायी संशोधन के बावजूद, केंद्र सरकार अब तक आर्बिट्रेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (Arbitration Council of India) का गठन करने में विफल रही है
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चर्चा में क्यों
2019 के विधायी संशोधन के बावजूद, केंद्र सरकार अब तक आर्बिट्रेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (Arbitration Council of India) का गठन करने में विफल रही है। इस देरी की पूर्व विधि सचिव पी.के. द्वारा आलोचना की गई है।
पृष्ठभूमि
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विवादों के निपटारे के लिए इस संस्थागत तंत्र की स्थापना में प्रगति की कमी पर चिंता व्यक्त की है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाआर्बिट्रेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (Arbitration Council of India): एक वैधानिक निकाय जिसका उद्देश्य संस्थागत आर्बिट्रेशन (Institutional Arbitration) को बढ़ावा देना है।
- पदअर्जुन राम मेघवाल: भारत के केंद्रीय कानून मंत्री (Union Law Minister)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एक संस्थागत मध्यस्थता ढांचे की स्थापना किस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय विवाद समाधान के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ कर सकती है, चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संस्थागत बाधा: समर्पित काउंसिल बनाने में देरी एड-हॉक से संस्थागत आर्बिट्रेशन की ओर बढ़ने में रुकावट है
- ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस: मज़बूत रेगुलेटरी बॉडी की कमी से निवेशकों का भरोसा और इंटरनेशनल कमर्शियल लॉ में भारत की स्थिति प्रभावित होती है
मुख्य शब्द: संस्थागत मध्यस्थता · विवाद समाधान · विधायी देरी · ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस · आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलिएशन एक्ट
शासन पर और नोट्स
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