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जैव विविधता और आनुवंशिक विविधता का संरक्षण: GS3 और पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी का एक केस स्टडी।
शोधकर्ताओं ने एक टोडा भैंसे के बछड़े में एल्बिनिज्म (albinism) के संदिग्ध मामले को प्रलेखित किया है, जो इस लुप्तप्राय नस्ल के संरक्षण हेतु आनुवंशिक और फेनोटाइपिक विविधता के दस्तावेजीकरण की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
टोडा भैंसा नीलगिरी क्षेत्र की एक स्थानिक और लुप्तप्राय प्रजाति है। 19वीं शताब्दी के मध्य से इसकी जनसंख्या 2,100 से अधिक से घटकर एक हजार से भी कम रह गई है।
Toda भैंस के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उत्तर: (c) केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है: जनसंख्या घटकर एक हजार से कम व्यक्तियों रह गई।
Q. भारत में लुप्तप्राय स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण में आनुवंशिक विविधता और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
कीवर्ड: Genetic diversity · Endangered species · Phenotypic variation · In-situ conservation · Biodiversity documentation
यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।