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भाग I · स्था. 11.2025 
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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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2027 में श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा TRISHNA सैटेलाइट, पानी के संसाधनों की होगी मैपिंग

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· Space technology (ISRO, missions)· Prelims·

चर्चा में क्यों

ISRO और CNES जल संसाधनों के मानचित्रण और वैश्विक जल चक्र की निगरानीके लिए 2027 में श्रीहरिकोटा से TRISHNA उपग्रह प्रक्षेपित करने हेतु परस्पर सहयोग कर रहे हैं।

पृष्ठभूमि

TRISHNA (Thermal infraRed Imaging Satellite for High-resolution Natural resource Assessment) 700 किमी से ऊपर सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा (Sun-synchronous orbit) में संचालित होगा। इसका उद्देश्य प्रति सप्ताह कई बार पुन: अवलोकन के साथ 60 मीटर से बेहतर रिज़ॉल्यूशन प्रदान करना है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • विज्ञान-तकनीकTRISHNA: Thermal InfraRed Imaging Satellite for High-resolution Natural resource Assessment।
  • तथ्यTRISHNA पृथ्वी से 700 किलोमीटर से अधिक की ऊंचाई पर एक Sun-synchronous orbit में संचालित होगा।
  • तथ्यTRISHNA का लक्ष्य 60 मीटर से बेहतर रिज़ॉल्यूशन प्रदान करना है।
  • स्थानश्रीहरिकोटा: TRISHNA मिशन के लिए प्रक्षेपण स्थल।
  • विज्ञान-तकनीकCNES (फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी) थर्मल इन्फ्रारेड उपकरण की आपूर्ति करती है; ISRO ऑप्टिकल पेलोड विकसित करता है।

मेन्स के लिए

Q. भारत में जल की कमी और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को कम करने में 'तृष्णा' (TRISHNA) जैसी अंतरिक्ष-आधारित रिमोट सेंसिंग प्रौद्योगिकियां किस प्रकार सहायक हो सकती हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • Data resolution gap: Bridging the trade-off between high-frequency observations and high-spatial resolution
  • Climate adaptation: Monitoring transpiration and sublimation to manage retreating glaciers and intensifying droughts

कीवर्ड: Remote Sensing · Sun-synchronous orbit · Thermal Infrared · Water Scarcity · Space Cooperation

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: NDTV ↗यह भी: GS3 · Climate change & international agreements

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।