ग्लेशियर टूटने से हुए नुकसान पर नेपाल MP ने भारत को दिया धन्यवाद
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चर्चा में क्यों
नेपाल की सांसद विदुषी राणा ने एक विनाशकारी हिमनद विखंडन (glacial collapse) के पश्चात भारत द्वारा प्रदान की गई राहत और तकनीकी सहायता के लिए आभार व्यक्त किया तथा इस क्षेत्र पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को रेखांकित किया।
पृष्ठभूमि
ग्लेशियर के ढहने के पश्चात बचाव कार्यों हेतु नेपाल ने 9,200 से अधिक सुरक्षा बलों को तैनात किया है। अब तक 1,100 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 4,500 लोग अभी भी लापता हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यग्लेशियर के ढहने के बाद बचाव कार्यों के लिए नेपाल ने 9,200 से अधिक सैनिकों को तैनात किया।
- स्थाननेपाल दक्षिण एशिया का एक भू-आबद्ध (landlocked) देश है, जिसकी भारत के साथ एक लंबी सीमा साझा होती है।
- विज्ञान-तकनीकहिमनद पतन (Glacial collapse) जलवायु परिवर्तन और पिघलते क्रायोस्फीयर (cryosphere) का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
मेन्स के लिए
Q. जलवायु परिवर्तन से प्रेरित आपदाओं के संकट के समय अपने पड़ोसी देशों को मानवीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने में भारत की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- India's 'Neighborhood First' policy
- Climate justice and global emissions
- Technical cooperation in disaster management
कीवर्ड: Climate Justice · Humanitarian Assistance · Neighborhood First · Cryosphere · Disaster Resilience
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।