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भाग I · स्था. 11.2025 
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मध्य रेलवे, पश्चिमी घाटों में मृदा अपरदन और भूस्खलन की समस्या को कम करनेके लिए जैव-अभियांत्रिकी (bio-engineering) समाधान के रूप में वेटीवर घास के रोपण को अपना रहा है

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चर्चा में क्यों

मध्य रेलवे, पश्चिमी घाटों में मृदा अपरदन और भूस्खलन की समस्या को कम करनेके लिए जैव-अभियांत्रिकी (bio-engineering) समाधान के रूप में वेटीवर घास के रोपण को अपना रहा है।

पृष्ठभूमि

मध्य रेलवे ने भोर घाट और थाल घाट में वेटीवर घास (Chrysopogon zizanioides) लगाने की योजना बनाई है। इस घास का चयन इसकी सघन जड़ प्रणाली के कारण किया गया है, जो मृदा को स्थिरता प्रदान करती है और सतही अपवाह को कम करती है। इसके अंतर्गत 5,300 वर्ग मीटर के क्षेत्र में एक प्रायोगिक वृक्षारोपण पहले ही शुरू किया जा चुका है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • पर्यावरणVetiver Grass (Chrysopogon zizanioides) का उपयोग मृदा स्थिरीकरण (soil stabilization) और मृदा अपरदन नियंत्रण (erosion control) के लिए किया जाता है।
  • स्थानभोर घाट और थाल घाट पश्चिमी घाट के प्रमुख घाट खंड हैं जो तटीय मैदानों को दक्कन के पठार से जोड़ते हैं।
  • तथ्यपायलट वृक्षारोपण 5,300 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: पश्चिमी घाट जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में भूगर्भीय खतरों और बुनियादी ढांचे को होने वाली क्षति को कम करने में जैव-अभियांत्रिकी (bio-engineering) और प्रकृति-आधारित समाधानों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।