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भाग I · स्था. 11.2025 
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ग्लेशियर पिघलने पर नई किताब लॉन्च, कमजोर समुदायों के लिए एक्शन की मांग

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· Climate change & international agreements· Prelims·

चर्चा में क्यों

चिन्तन रिसर्च फाउंडेशन ने ग्लेशियरों के पिघलने और ग्लोबल साउथ के लिए जलवायु अनुकूलन रणनीतियों पर प्रकाश डालने वाली एक पुस्तक प्रकाशित की है, जिसे COP 31 में प्रस्तुत किया जाना है।

पृष्ठभूमि

'नेविगेटिंग द क्लाइमेट क्राइसिस' (Navigating the Climate Crisis) पुस्तक का संपादन डॉ. देबाजीत पालित द्वारा किया गया है, जिसमें 22 विद्वानों के योगदान सम्मिलित हैं। यह कृति मुख्य रूप से एशिया और अफ्रीका में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर केंद्रित है, जिसमें हिमनदों के पिघलने और जलवायु वित्त की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • स्थानCOP 31: नवंबर में अंताल्या, तुर्की में आयोजित होने वाला है।
  • तथ्ययह पुस्तक विशेष रूप से Global South के लिए जलवायु अनुकूलन और शमन रणनीतियों पर केंद्रित है।
  • विज्ञान-तकनीकग्लेशियरों का पिघलना एशिया और अफ्रीका में आपदा लचीलेपन (disaster resilience) को प्रभावित करने वाले एक महत्वपूर्ण जलवायु प्रभाव के रूप में पहचाना गया है।

मेन्स के लिए

Q. ग्लोबल साउथ पर जलवायु परिवर्तन के असमान प्रभाव को संबोधित करने में जलवायु वित्त और शासन ढाँचों के महत्व की चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • Climate justice for Global South
  • Role of climate finance
  • Glacier melting and disaster resilience
  • Way forward: Strengthening international governance

कीवर्ड: Climate Adaptation · Mitigation · Global South · Climate Finance · Disaster Resilience

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: NDTV ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।