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India's Ground Truth Record
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भाग I · स्था. 11.2025 
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सत्याधीश
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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इंडस्ट्री की परिभाषा में वर्कर्स के अधिकारों पर रोक लगाने के लिए ट्रेड यूनियन्स ने सुप्रीम कोर्ट को घेरा

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· Employment & inclusive growth· Mains·

चर्चा में क्यों

ट्रेड यूनियनों ने औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code) के अंतर्गत 'उद्योग' की परिभाषा को संकुचित करने वाले सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के निर्णय की आलोचना की है, जिससे संभावित रूप से श्रमिक सुरक्षा के दायरे में कमी आ सकती है।

पृष्ठभूमि

22 अगस्त, 2026 को, उच्चतम न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की पीठ ने औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code) पर अपना निर्णय सुनाया। अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) और CITU ने आरोप लगाया कि यह निर्णय श्रमिकों के अधिकारों की तुलना में प्रबंधकीय हितों को प्राथमिकता प्रदान करता है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाAITUC: All India Trade Union Congress भारत में एक प्रमुख ट्रेड यूनियन फेडरेशन है।
  • अधिनियम / विधेयकIndustrial Relations Code: श्रम नियमों को सरल बनाने के उद्देश्य से एक समेकित श्रम कानून।
  • तथ्ययह निर्णय उच्चतम न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिया गया था।

मेन्स के लिए

Q. भारत के विकसित होते आर्थिक परिदृश्य में 'उद्योग' की परिभाषा को संकुचित करने के श्रम अधिकारों और औद्योगिक शांति पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • impact on collective bargaining
  • managerial vs. worker interests
  • constitutional protections for labor
  • need for balanced industrial relations

कीवर्ड: labor rights · industrial relations · managerial interests · collective bargaining · constitutional mandates

पूरा कालक्रम (रिवीजन के लिए) →पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: The Hindu ↗यह भी: GS2 · Judiciary & landmark judgments

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।