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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय मक्का सुरक्षा समझौता कोई हैरानी की बात नहीं थी

GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· भारत के द्विपक्षीय संबंध· प्रीलिम्स + मेन्स·

चर्चा में क्यों

सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के मध्य एक त्रिपक्षीय मक्का सुरक्षा समझौते के गठन का क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत की रणनीतिक स्थिति पर इसके प्रभावों के संदर्भ में विश्लेषण किया जा रहा है।

पृष्ठभूमि

मक्का सुरक्षा समझौता सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान को सम्मिलित करता है। यह सऊदी अरब और पाकिस्तान के मध्य मौजूदा रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते (SMDA) का पूरक है। इस समझौते का उद्देश्य आक्रामकता के विरुद्ध सामूहिक निवारण सुनिश्चित करना है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यSMDA: सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता (Strategic Mutual Defence Agreement) अस्तित्व में है।
  • स्थानमक्का सुरक्षा समझौता: सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता।
  • विज्ञान-तकनीकसामूहिक निवारण (Collective deterrence): एक सैन्य रणनीति जहाँ कई राष्ट्र आपसी रक्षा के माध्यम से आक्रमण को रोकने के लिए सहमत होते हैं।

मेन्स के लिए

प्रश्न: मध्य पूर्व में त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौतों के भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: एनडीटीवी ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।