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भाग I · स्था. 11.2025 
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KERC ने बिजली का ड्राफ्ट पब्लिश किया

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चर्चा में क्यों

कर्नाटक विद्युत नियामक आयोग (KERC) ने उपभोक्ता पारदर्शिता बढ़ाने और कनेक्शन प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से विद्युत आपूर्ति विनियम (ESR) 2026 का एक मसौदा जारी किया है।

पृष्ठभूमि

KERC का मसौदा बिजली आपूर्ति कंपनियों के लिए बिलों और वेबसाइटों पर बिजली कटौती की आवृत्ति और अवधि को सार्वजनिक रूप से प्रकट करना अनिवार्य बनाता है। यह एक ऐसी व्यवस्था प्रस्तुत करता है जिसके अंतर्गत यदि व्यवधान एक विशिष्ट सीमा से अधिक हो जाते हैं, तो उपभोक्ताओं को शुल्क से छूट दी जाएगी। साथ ही, यह नए कनेक्शनों के लिए स्व-प्रमाणन (self-certification) की अनुमति प्रदान करता है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाKERC: कर्नाटक में विद्युत क्षेत्र को विनियमित करने के लिए जिम्मेदार एक वैधानिक निकाय।
  • तथ्यESR 2026: बिजली कटौती की आवृत्ति और अवधि के अनिवार्य प्रकटीकरण की आवश्यकता वाले मसौदा नियम।
  • तथ्यस्व-प्रमाणन (Self-certification): नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु एक प्रस्तावित तंत्र।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के विद्युत क्षेत्र में विनियामक सुधार किस प्रकार उपभोक्ता अधिकारों को सुदृढ़ कर सकते हैं और व्यापार करने की सुगमता (ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस) में सुधार कर सकते हैं, चर्चा कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)यह भी: GS2 · वैधानिक, नियामक एवं अर्ध-न्यायिक संस्थाएं

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।