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भाग I · स्था. 11.2025 
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सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शनों में फेस रिकग्निशन के इस्तेमाल पर दिल्ली पुलिस से पूछे सवाल

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चर्चा में क्यों

उच्चतम न्यायालय ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के उपयोग की आनुपातिकता और वैधता की समीक्षा की, जिसमें सार्वजनिक सुरक्षा और निजता के अधिकार के मध्य उत्पन्न तनाव को रेखांकित किया गया।

पृष्ठभूमि

18 अगस्त, 2026 को, उच्चतम न्यायालय ने NEET-UG विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा FRS के उपयोग की समीक्षा की। पुलिस ने इस तकनीक के माध्यम से गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 व्यक्तियों की पहचान करने की रिपोर्ट प्रस्तुत की।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • विज्ञान-तकनीकFRS (Facial Recognition Systems) व्यक्तियों की पहचान करने के लिए वास्तविक समय (real-time) या छवियों से बायोमेट्रिक डेटा का उपयोग करते हैं।
  • तथ्यदिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान FRS का उपयोग करते हुए आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 व्यक्तियों की पहचान की।
  • पदतुषार मेहता भारत के सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General of India) के रूप में कार्यरत हैं।

मेन्स के लिए

प्रश्न: निजता के अधिकार के संदर्भ में, कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के उपयोग से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंग

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।