NEET विरोध प्रदर्शन में पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस; जांच के लिए बनाई हाई-पावर्ड कमेटी
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चर्चा में क्यों
भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने NEET विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा की गई कथित ज्यादतियों की जांचकरनेके लिए हस्तक्षेप किया है, जो सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान मौलिक अधिकारों के संरक्षण को सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है।
पृष्ठभूमि
18 अगस्त, 2026 को, सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली में NEET विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस आचरण के संबंध में एक नोटिस जारी किया। वीडियो फुटेज और महिला प्रदर्शनकारियों को लक्षित करने के आरोपों की जांच करनेके लिए पूर्व न्यायाधीशों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों वाले एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय: भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था, जो न्यायिक पुनरावलोकन (judicial review) का प्रयोग करती है।
- तथ्यजांच समिति में पूर्व न्यायाधीश और कानून प्रवर्तन अधिकारी शामिल हैं।
- स्थानदिल्ली: विरोध प्रदर्शनों का स्थान और सर्वोच्च न्यायालय का मुख्यालय।
मेन्स के लिए
Q. सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान मौलिक अधिकारों के संरक्षण को सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका और कानून प्रवर्तन में जवाबदेही के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Judicial review of executive actions
- Protection of Right to Protest
- Accountability of police forces
- Way forward: Standard Operating Procedures (SOPs) for protests
कीवर्ड: Judicial Review · Fundamental Rights · Accountability · Rule of Law · Police Excesses
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।