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भाग I · स्था. 11.2025 
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि 24 सप्ताह तक की गर्भावस्था वाली बलात्कार की उत्तरजीवी महिलाओं के लिए गर्भपात हेतु न्यायालय की अनुमति आवश्यक नहीं है, और इस निर्णय में प्रजनन अधिकारों पर बल दिया गया है

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चर्चा में क्यों

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि 24 सप्ताह तक की गर्भावस्था वाली बलात्कार की उत्तरजीवी महिलाओं के लिए गर्भपात हेतु न्यायालय की अनुमति आवश्यक नहीं है, और इस निर्णय में प्रजनन अधिकारों पर बल दिया गया है।

पृष्ठभूमि

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट ने 11 अगस्त को यह निर्णय सुनाया। न्यायालय ने 20 फरवरी, 2025 के एक खंडपीठ के निर्णय का उल्लेख किया और मध्य प्रदेश स्वास्थ्य आयुक्त को इस निर्णय के बारे में अस्पतालों को सूचित करने का निर्देश दिया।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • स्थानमध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर (प्रधान पीठ) और इंदौर (पीठ) में स्थित है।
  • तथ्यन्यायालय का निर्णय बलात्कार पीड़ितों के लिए न्यायालय की अनुमति के बिना गर्भपात के लिए 24 सप्ताह की समय सीमा निर्दिष्ट करता है।
  • पदन्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं।

मेन्स के लिए

Q. भारत में यौन उत्पीड़न के पीड़ितों के प्रजनन अधिकारों के कानूनी और नैतिक आयामों की चर्चा कीजिए। न्यायिक हस्तक्षेप व्यक्तिगत अधिकारों और चिकित्सा प्रोटोकॉल के बीच संतुलन को किस प्रकार स्थापित करता है? विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • Right to bodily autonomy
  • Judicial activism vs. legislative gaps
  • Mental health of survivors
  • Way forward: Standardized medical protocols

कीवर्ड: Reproductive rights · Judicial intervention · Bodily autonomy · Sexual assault survivors · Medical ethics

पूरी खबर पढ़ें →स्रोत: The Hindu ↗यह भी: GS2 · Judiciary & landmark judgments

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।