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भाग I · स्था. 11.2025 
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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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SEBI ने कमोडिटी डेरिवेटिव्स के लिए Z-score थ्रेशोल्ड 10 से घटाकर 5 किया

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चर्चा में क्यों

व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार हेतु SEBI ने कमोडिटी डेरिवेटिव्स में स्ट्रेस टेस्टिंग के लिए Z-score थ्रेशोल्ड में संशोधन किया है।

पृष्ठभूमि

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कोर सेटलमेंट गारंटी फंड (Core SGF) ढांचे के लिए Z-स्कोर की सीमा को 10 से घटाकर 5 कर दिया है। इस गणना में 15 वर्षों की अवधि के दौरान 'मार्जिन पीरियड ऑफ रिस्क' के दौरान प्राप्त प्रतिफल (returns) के माध्य (mean) और सिग्मा (sigma) का उपयोग किया जाता है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाSEBI: भारत में प्रतिभूतियों (securities) और कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजारों का प्राथमिक नियामक।
  • तथ्यवस्तुगत डेरिवेटिव्स (commodity derivatives) के स्ट्रेस टेस्टिंग के लिए Z-score थ्रेशोल्ड को 10 से घटाकर 5 कर दिया गया है।
  • तथ्यCore SGF: यह 15-वर्षीय Margin Period of Risk के दौरान रिटर्न के mean और sigma का उपयोग करता है।

मेन्स के लिए

Q. वस्तुगत डेरिवेटिव बाजारों में विनियामक सुधार किस प्रकार भारत में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और वित्तीय बाजार की स्थिरता में योगदान देते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • market liquidity
  • risk mitigation
  • regulatory oversight
  • Ease of Doing Business

कीवर्ड: Stress Testing · Market Stability · Regulatory Framework · Ease of Doing Business

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: Economic Times ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।