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भाग I · स्था. 11.2025 
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दिल्ली हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में कपड़ों को दोष देने की आलोचना की, 2013 के फैसले को बरकरार रखा

GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· Vulnerable sections (SC/ST, minorities, disabled, elderly, children)· Prelims + Mains·

चर्चा में क्यों

दिल्ली उच्च न्यायालय ने महिला के पहनावे के आधार पर पीड़िता को दोष देने की प्रथा की निंदा करते हुए, यौन उत्पीड़न के मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

पृष्ठभूमि

दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354A(1)(i) के अंतर्गत वर्ष 2013 में दिए गए दोषसिद्धि के निर्णय को बरकरार रखा। न्यायालय ने पीड़िता की अल्पसंख्यक स्थिति से संबंधित अपर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर POCSO अधिनियम के लागू होने के आवेदन को खारिज कर दिया।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • अधिनियम / विधेयकIPC की धारा 354A कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न से संबंधित है।
  • अधिनियम / विधेयकPOCSO Act (Protection of Children from Sexual Offences Act) विशेष रूप से नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर लागू होता है।
  • संस्थादिल्ली उच्च न्यायालय NCT दिल्ली में सर्वोच्च न्यायिक निकाय है।

मेन्स के लिए

Q. यौन उत्पीड़न के मामलों में 'पीड़ित को दोष देने' (victim-blaming) की प्रवृत्ति को संबोधित करने में निहित सामाजिक-कानूनी चुनौतियों और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा में न्यायिक संवेदनशीलता के महत्व का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • societal mindset of victim-blaming
  • judicial interpretation of IPC 354A
  • protection of personal autonomy
  • way forward: gender-sensitization

कीवर्ड: victim-blaming · judicial activism · gender justice · personal autonomy · sexual harassment

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: NDTV ↗यह भी: GS2 · Judiciary & landmark judgmentsयह भी: GS1 · Women & gender issues

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।