CSIR-NAL ने पायलटों के प्रशिक्षण की जरूरतों को पूरा करने और विदेशी विमानों पर निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी हंसा-3(NG) ट्रेनर विमान का प्रोडक्शन वर्जन लॉन्च किया है
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चर्चा में क्यों
CSIR-NAL ने पायलटों के प्रशिक्षण की जरूरतों को पूरा करने और विदेशी विमानों पर निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी हंसा-3(NG) ट्रेनर विमान का प्रोडक्शन वर्जन लॉन्च किया है।
पृष्ठभूमि
हंसा-3(NG) में एक ऑल-कंपोजिट एयरफ्रेम (all-composite airframe) है, जिसे प्राइवेट पायलट लाइसेंस (PPL) और कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) प्रशिक्षण के लिए डिजाइन किया गया है। मेसर्स पायनियर क्लीन एम्प्स (M/s Pioneer Clean Amps) आंध्र प्रदेश के कुप्पम में ₹150 करोड़ की सुविधा में सालाना 100 विमानों का निर्माण करेगी।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- विज्ञान-तकनीकHansa-3(NG): एक स्वदेशी ट्रेनर एयरक्राफ्ट (trainer aircraft) जिसमें ऑल-कंपोजिट एयरफ्रेम (all-composite airframe) का उपयोग किया गया है।
- संस्थाCSIR-NAL: नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज (National Aerospace Laboratories), बेंगलुरु में स्थित है।
- तथ्यआंध्र प्रदेश के कुप्पम में स्थित M/s Pioneer Clean Amps फैसिलिटी की उत्पादन क्षमता सालाना 100 एयरक्राफ्ट (aircraft) है।
- पदजितेंद्र सिंह: केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री।
मेन्स के लिए
प्रश्न: हंसा-3(NG) जैसे स्वदेशी प्रशिक्षण विमानों के विकास से एयरोस्पेस और विमानन क्षेत्रों में भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' लक्ष्यों को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायता मिलती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: पायलट ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विदेशी OEMs पर निर्भरता कम करना
- इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम: घरेलू एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए ऑल-कंपोजिट एयरफ्रेम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
- स्किल डेवलपमेंट: लोकल प्रोडक्शन के ज़रिए PPL और CPL ट्रेनिंग की बढ़ती मांग को पूरा करना
मुख्य शब्द: स्वदेशी तकनीक · आत्मनिर्भर भारत · एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग · कंपोजिट मैटेरियल्स · पायलट ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।