भारतीय राज्यों में चार नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) का असमान कार्यान्वयन निगमों के लिए अनुपालन संबंधी जटिलताएँ उत्पन्न कर रहा है और निवेश की पूर्वानुमेयता को प्रभावित कर रहा है
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चर्चा में क्यों
भारतीय राज्यों में चार नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) का असमान कार्यान्वयन निगमों के लिए अनुपालन संबंधी जटिलताएँ उत्पन्न कर रहा है और निवेश की पूर्वानुमेयता को प्रभावित कर रहा है।
पृष्ठभूमि
केंद्र सरकार ने 29 मौजूदा श्रम कानूनों को चार नए संहिताओं में समाहित कर दिया है। वर्तमान रिपोर्टों के अनुसार, केवल चार राज्यों (गुजरात और अरुणाचल प्रदेश सहित) ने नियमों को पूर्णतः अधिसूचित किया है, जबकि अन्य राज्य अभी भी संक्रमण की स्थिति में हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यचार नए श्रम कोड निम्नलिखित हैं: Code on Wages, Industrial Relations Code, Social Security Code, और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code।
- संस्थाश्रम संहिताओं (Labour codes) को राज्य स्तर पर लागू किया जाता है, जिसके लिए प्रवर्तन हेतु राज्य-विशिष्ट नियमों की आवश्यकता होती है।
मेन्स के लिए
Q. भारत के विभिन्न राज्यों में केंद्रीय श्रम संहिताओं के खंडित कार्यान्वयन से व्यापार करने की सुगमता और औद्योगिक निवेश पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Regulatory friction: Divergent state-level compliance requirements increasing operational costs for multi-state corporations
- Federal-State tension: Conflict between central legislative intent and state-level administrative autonomy in labour regulation
- Investment risk: Lack of uniform legal predictability deterring long-term capital commitment in manufacturing sectors
कीवर्ड: Ease of Doing Business · Regulatory Uniformity · Federalism · Compliance Framework · Investment Predictability
अर्थव्यवस्था पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।