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भाग I · स्था. 11.2025 
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भारत सरकार दिसंबर में पूरक अनुदान की मांग (Supplementary Demands for Grants) का उपयोग तब करती है जब वास्तविक खर्च फरवरी में प्रस्तुत किए गए शुरुआती अनुमानों से अधिक हो जाता है और अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST)· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

भारत सरकार दिसंबर में पूरक अनुदान की मांग (Supplementary Demands for Grants) का उपयोग तब करती है जब वास्तविक खर्च फरवरी में प्रस्तुत किए गए शुरुआती अनुमानों से अधिक हो जाता है और अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है।

पृष्ठभूमि

वार्षिक बजट फरवरी में प्रस्तुत किया जाता है ताकि अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए खर्च की योजना बनाई जा सके। पूरक अनुदान की मांगें (Supplementary Demands for Grants) दिसंबर में प्रस्तुत की जाती हैं, जो वित्त वर्ष के 8-9 महीने बीत जाने के बाद प्राप्त सटीक खर्च के आंकड़ों पर आधारित होती हैं।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यसप्लीमेंट्री डिमांड्स फॉर ग्रांट्स (Supplementary Demands for Grants) आमतौर पर दिसंबर में प्रस्तुत किए जाते हैं।
  • तथ्यवार्षिक बजट फरवरी में प्रस्तुत किया जाता है, जो अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए होता है।
  • तथ्यसप्लीमेंट्री डिमांड्स (Supplementary Demands) वार्षिक बजट प्रेजेंटेशन के दौरान किए गए खर्च के अनुमानों पर आधारित होते हैं।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय संघ बजट में राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करने और अप्रत्याशित व्ययों को समायोजित करने में 'पूरक अनुदान मांगों' (Supplementary Demands for Grants) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • राजकोषीय लचीलापन: अनियोजित खर्च की ज़रूरत और संसदीय निगरानी के सिद्धांत के बीच संतुलन
  • अनुमान की सटीकता: शुरुआती बजट अनुमान और मध्य-वर्ष के वास्तविक खर्च की जरूरतों के बीच के अंतर को दूर करना

मुख्य शब्द: राजकोषीय नीति · अतिरिक्त मांगें · बजटीय अनुमान · व्यय प्रबंधन · राजकोषीय अनुशासन

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।