अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 95.74 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है
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चर्चा में क्यों
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 95.74 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकालने (foreign investor outflows) के कारण रुपये के 100 के स्तर को पार करने की आशंकाओं ने चिंता बढ़ा दी है।
पृष्ठभूमि
बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.74 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट का मुख्य कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (Foreign Portfolio Investors) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यरुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.74।
- तथ्यआयातित महंगाई (Imported inflation) का प्रभाव: एविएशन, ऑयल मार्केटिंग, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स।
- तथ्यनिर्यात के लाभार्थी: IT services, pharmaceuticals, textiles और manufacturing एक्सपोर्टर्स।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय अर्थव्यवस्था पर मुद्रा के अवमूल्यन के प्रभावों का विश्लेषण कीजिए और इसके कारण उत्पन्न होने वाले मुद्रास्फीति के दबावों का परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- इंपोर्टेड महंगाई: कच्चे तेल और ज़रूरी आयात की बढ़ती कीमतों का घरेलू कीमतों की स्थिरता पर असर
- ट्रेड डायनेमिक्स: आयात पर निर्भर मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात-उन्मुख सर्विस सेक्टर पर अलग-अलग प्रभाव
- कैपिटल फ्लाइट: करेंसी की स्थिरता और बाहरी कर्ज चुकाने पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के बाहर निकलने का असर
मुख्य शब्द: आयातित महंगाई · बाहरी संतुलन · करेंसी की वैल्यू में गिरावट · विदेशी पोर्टफोलियो निवेश · व्यापार संतुलन
अर्थव्यवस्था पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।