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भाग I · स्था. 11.2025 
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RBI के अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंग· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

RBI के अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index - CPI) 4.6% के अनुमान से ऊपर जा सकता है। इस कारण 2026 की दूसरी छमाही (H2) में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

पृष्ठभूमि

RBI ने फरवरी से ब्याज दरों पर यथास्थिति (status quo) बनाए रखी है। हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने 2026 की दूसरी छमाही में दो बार दरें बढ़ाने की भविष्यवाणी की है, लेकिन 5 जून की बैठक में दरों को यथावत रखने पर आम सहमति है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यFY27 के लिए CPI का अनुमान: 4.6%।
  • तथ्यRBI का स्टेटस क्वो (status quo) पीरियड: फरवरी से जून 2026।

मेन्स के लिए

प्रश्न: अस्थिर महंगाई वाले परिवेश में, आर्थिक विकास की आवश्यकता और महंगाई लक्ष्य निर्धारण के बीच संतुलन स्थापित करने में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • मौनेटरी पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: CPI को नियंत्रित करने के लिए हाई इंटरेस्ट रेट और औद्योगिक विकास के लिए क्रेडिट उपलब्धता के बीच संतुलन
  • महंगाई का दबाव: RBI के रेपो रेट के रास्ते पर CPI के अनिश्चित उतार-चढ़ाव का असर

मुख्य शब्द: मौनेटरी पॉलिसी · उपभोक्ता मूल्य सूचकांक · महंगाई लक्ष्यीकरण · रेपो रेट · यथास्थिति

पूरा कालक्रम (रिवीजन के लिए) →पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।