नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) ने एर्नाकुलम के थेवारा-पेरंडूर और एडप्पल्ली नहरों में 'बहुत अधिक' (too numerous to count - TNC) स्तर का मल-प्रदूषण (faecal contamination) पाया है
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चर्चा में क्यों
नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) ने एर्नाकुलम के थेवारा-पेरंडूर और एडप्पल्ली नहरों में 'बहुत अधिक' (too numerous to count - TNC) स्तर का मल-प्रदूषण (faecal contamination) पाया है।
पृष्ठभूमि
यह अध्ययन केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal) के उस निर्देश के बाद शुरू किया गया, जिसमें अवैध अपशिष्ट जल (wastewater) के विसर्जन का मुद्दा उठाया गया था। रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि वर्तमान में ये नहरें वर्षा जल और घरेलू सीवेज, दोनों से प्रदूषित हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाNEERI: नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट।
- संस्थाकेरल स्टेट पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड: प्रदूषण की निगरानी के लिए जिम्मेदार राज्य निकाय।
- तथ्यTNC: पानी के सैंपल में मल (faecal) संदूषण के लिए 'Too Numerous to Count' स्टेटस।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में शहरी जल निकायों के प्रबंधन में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और औद्योगिक एवं घरेलू अपशिष्ट जल के अवैध विसर्जन को रोकने के लिए उचित उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- रेगुलेटरी गैप: शहरी नहर नेटवर्क में विकेंद्रीकृत घरेलू सीवेज डिस्चार्ज की निगरानी में मुश्किल
- इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: नहर में पानी छोड़ने से पहले पर्याप्त सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का अभाव
- कानूनी प्रवर्तन: अवैध कचरा डंपिंग के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों को लागू करने में चुनौतियां
मुख्य शब्द: मल-प्रदूषण · अर्बन वॉटर मैनेजमेंट · वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट · नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल · प्रदूषण की निगरानी
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।