शोधकर्ताओं ने लैब में मंगल ग्रह जैसी स्थितियाँ (शॉकवेव्स और परक्लोरेट साल्ट्स) सफलतापूर्वक दोहराईं
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चर्चा में क्यों
शोधकर्ताओं ने लैब में मंगल ग्रह जैसी स्थितियाँ (शॉकवेव्स और परक्लोरेट साल्ट्स) सफलतापूर्वक दोहराईं, जिसमें पाया गया कि यीस्ट सेल्स ने मॉलिक्यूलर शील्ड्स (molecular shields) बनाकर खुद को जीवित रखा।
पृष्ठभूमि
इस प्रयोग में मंगल ग्रह पर पाए जाने वाले तीव्र शॉकवेव्स (shockwaves) और जहरीले परक्लोरेट साल्ट्स (perchlorate salts) का अनुकरण किया गया। यह देखा गया कि यीस्ट सेल्स (yeast cells) इन प्रतिकूल परिस्थितियों से महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए मॉलिक्यूलर शील्ड्स (molecular shields) का निर्माण करते हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यYeast cells: इन्हें चरम वातावरण (extreme environments) में माइक्रोबियल रेजिलिएंस (microbial resilience) को प्रदर्शित करने के लिए एक मॉडल ऑर्गेनिज्म के रूप में उपयोग किया जाता है।
- विज्ञान-तकनीकमॉलिक्यूलर शील्ड्स (Molecular shields): महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को शॉकवेव्स (shockwaves) और केमिकल टॉक्सिसिटी (chemical toxicity) से बचाने के लिए पहचाने गए जैविक तंत्र (Biological mechanisms)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अत्यधिक प्रतिकूल वातावरण में सूक्ष्मजीवों की सहनशीलता की खोज किस प्रकार परग्रही जीवन की खोज और 'रहने योग्य क्षेत्रों' (habitable zones) की परिभाषा को प्रभावित करती है, इस पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- एस्ट्रोबायोलॉजी में बदलाव: 'हैबिटेबल ज़ोन' की परिभाषा को पृथ्वी जैसे वायुमंडलीय हालातों से आगे बढ़ाया
- तकनीकी प्रभाव: प्लैनेटरी प्रोटेक्शन और लाइफ-डिटेक्शन प्रोटोकॉल के लिए लैब सिमुलेशन तकनीकों को आगे बढ़ाना
मुख्य शब्द: एस्ट्रोबायोलॉजी · एक्सट्रीमोफाइल्स · प्लैनेटरी साइंस · मॉलिक्यूलर रेज़िलिएंस · रहने योग्य क्षेत्र
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।