सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर नफरत फैलाने वाले भाषण (Hate Speech) और नफरत से जुड़े अपराधों की घटनाओं में बढ़ोतरी के बाद
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चर्चा में क्यों
सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर नफरत फैलाने वाले भाषण (Hate Speech) और नफरत से जुड़े अपराधों की घटनाओं में बढ़ोतरी के बाद, ओडिशा राज्य विधि आयोग ने ऐसे अपराधों से निपटने के लिए एक नए कानून की सिफारिश की है।
पृष्ठभूमि
ओडिशा राज्य विधि आयोग ने सेवानिवृत्त ओडिशा हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस बिस्वनाथ रथ के नेतृत्व में इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लिया। इस मामले को जनवरी 2026 में जांच के लिए एक उप-समिति को भेज दिया गया।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाओडिशा स्टेट लॉ कमीशन (Odisha State Law Commission): ओडिशा राज्य में कानूनी सुधारों की सिफारिश करने के लिए जिम्मेदार संस्था।
- पदजस्टिस बिस्वनाथ रथ: ओडिशा स्टेट लॉ कमीशन के अध्यक्ष, जो ओडिशा हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त (Retired) जज हैं।
- तथ्यजनवरी 2026: वह महीना जब मामले की जांच के लिए इसे एक सब-कमेटी (sub-committee) को भेजा गया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: डिजिटल युग में अभिव्यक्ति और भाषण की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और घृणास्पद भाषण (हेट स्पीच) के विरुद्ध कानून बनाने के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- रेगुलेटरी फ्रिक्शन: संवैधानिक अभिव्यक्ति की आज़ादी और सांप्रदायिक कलह रोकने की राज्य की शक्ति के बीच संतुलन
- डिजिटल प्रवर्तन में अंतर: डिसेंट्रलाइज्ड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गुमनाम हेट स्पीच की पहचान और कार्रवाई में तकनीकी बाधाएं
मुख्य शब्द: हेट स्पीच · सोशल मीडिया रेगुलेशन · सांप्रदायिक सद्भाव · विधायी सुधार · सुओ मोटो संज्ञान
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।