हरियाणा में पिंक बोलवर्म (Pink Bollworm) के प्रकोप और घटती पैदावार के कारण कपास किसान संकट का सामना कर रहे हैं
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चर्चा में क्यों
हरियाणा में पिंक बोलवर्म (Pink Bollworm) के प्रकोप और घटती पैदावार के कारण कपास किसान संकट का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते वे चावल और पोल्ट्री जैसे वैकल्पिक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि
हरियाणा में कीटों के प्रकोप और डीजल व उर्वरकों की बढ़ती लागत के कारण कपास की पैदावार में भारी गिरावट आई है। सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वर्तमान में उत्पादन की इन बढ़ती लागतों की भरपाई करने के लिए अपर्याप्त है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यहरियाणा में कपास की पैदावार में गिरावट के लिए पिंक बोलवर्म (Pink bollworm) को मुख्य कीट के रूप में पहचाना गया है।
- तथ्यहरियाणा के किसान कपास के विकल्प के रूप में चावल और पोल्ट्री फार्मिंग की ओर रुख कर रहे हैं।
- तथ्यहरियाणा की सरकारी योजनाएं जल-कुशल फसलों (water-efficient crops) को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखती हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: हरियाणा में कपास की खेती में गिरावट के लिए उत्तरदायी कारकों का विश्लेषण कीजिए और लघु कृषकों के लिए कपास की खेती की स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- इनपुट-कॉस्ट में अंतर: डीजल और उर्वरक की बढ़ती कीमतें मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य ढांचे से आगे निकल रही हैं
- पारिस्थितिक-आर्थिक बदलाव: कपास से पानी की अधिक खपत वाली धान की फसलों की ओर बदलाव जल-दक्षता के लक्ष्यों को कमजोर कर रहा है
- लेबर मार्केट में रुकावट: मौसमी कपास की खेती में गिरावट से ग्रामीण खेतिहर मजदूरों की आजीविका प्रभावित
मुख्य शब्द: न्यूनतम समर्थन मूल्य · इनपुट लागत · फसल विविधीकरण · कीट प्रबंधन · ग्रामीण आजीविका
कृषि पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।