लोकसभा ने वित्त विधेयक (Finance Bill) को मंजूरी दे दी है, जिसमें टैक्स कंप्लायंस (tax compliance) को सरल बनाने
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चर्चा में क्यों
लोकसभा ने वित्त विधेयक (Finance Bill) को मंजूरी दे दी है, जिसमें टैक्स कंप्लायंस (tax compliance) को सरल बनाने, मुकदमेबाजी को कम करने और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत प्रदान करने के लिए संशोधन शामिल हैं।
पृष्ठभूमि
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले आदेशों को पुन: मान्य करने और रद्द किए गए मामलों को फिर से खोलने के प्रावधानों का बचाव किया। यह विधेयक कर भुगतान न करने पर गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाता है और पुनर्मूल्यांकन नोटिस (reassessment notices) के लिए 30 दिनों की प्रतिक्रिया अवधि प्रदान करता है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यफाइनेंस बिल (Finance Bill) पुनर्मूल्यांकन नोटिस (reassessment notices) के लिए 30 दिनों की प्रतिक्रिया विंडो प्रदान करता है।
- तथ्ययह बिल टैक्स न चुकाने पर गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाता है।
- तथ्ययह बिल ओवरसीज एजुकेशन रिमिटेंस (overseas education remittances) और टूर पैकेजेस पर सोर्स पर होने वाले टैक्स कलेक्शन को कम करता है।
- तथ्यइस बिल के तहत जीवन रक्षक दवाओं (life-saving drugs) पर कस्टम ड्यूटी छूट प्रदान की गई है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में कर अनुपालन को सरल बनाने और मुकदमों को कम करने से व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) को कैसे बढ़ावा मिल सकता है और कर उत्तोलन (Tax Buoyancy) में कैसे सुधार हो सकता है, चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- प्रशासनिक दक्षता: राजस्व वसूली को आसान बनाने के लिए पुराने आदेशों के पुनर्मूल्यांकन के जरिए मुकदमेबाजी कम करना
- राजकोषीय नीति के ट्रेड-ऑफ: जीवन रक्षक दवाओं पर टैक्स छूट और निरंतर राजकोषीय राजस्व की ज़रूरत के बीच संतुलन
- ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस: निवेशकों के लिए बेहतर टैक्स व्यवस्था बनाने हेतु गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाना
मुख्य शब्द: ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस · टैक्स कंप्लायंस · राजकोषीय नीति · मुकदमेबाजी में कमी · टैक्सेशन रिफॉर्म
अर्थव्यवस्था पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।