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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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पूर्व सांसद के.पी

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चर्चा में क्यों

पूर्व सांसद के.पी. उन्नीकृष्णन के निधन ने ऐतिहासिक 'C-DOT गाथा' की याद दिला दी है, जिसमें राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण सैम पिट्रोडा को हटा दिया गया था, जिससे भारत के स्वदेशी दूरसंचार विकास में बाधा आई थी।

पृष्ठभूमि

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) एक ऐसी संस्था थी जिसका कार्य भारत में स्वदेशी दूरसंचार तकनीक विकसित करना था। वर्ष 1990 में, संचार मंत्री के.पी. उन्नीकृष्णन ने इसके अध्यक्ष सैम पिट्रोडा की जांच और उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया की निगरानी की थी।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाC-DOT: सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (Centre for Development of Telematics)।
  • तथ्यके.पी. उन्नीकृष्णन ने दिसंबर 1989 से अप्रैल 1990 तक Communications Minister के रूप में कार्य किया।
  • पदसैम पित्रोडा ने C-DOT के चेयरमैन के रूप में कार्य किया।

मेन्स के लिए

प्रश्न: सी-डॉट (C-DOT) के उदाहरण का संदर्भ लेते हुए, भारत में स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास की वृद्धि में बाधक बनने वाले संस्थागत और राजनीतिक कारकों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • प्रशासनिक टकराव: नौकरशाही की बाधाएं और R&D निकायों के लिए स्वायत्तता की कमी
  • राजनीतिक हस्तक्षेप: लंबी अवधि के तकनीकी आत्मनिर्भरता पर अल्पकालिक राजनीतिक फैसलों का असर
  • संस्थागत गति: नेतृत्व की अस्थिरता के कारण स्वदेशी इनोवेशन में निरंतरता की कमी

मुख्य शब्द: स्वदेशी तकनीक · तकनीकी संप्रभुता · नौकरशाही की बाधाएं · संस्थागत स्वायत्तता · R&D इकोसिस्टम

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंग

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।