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भाग I · स्था. 11.2025 
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वित्त मंत्रालय ने संसद को सूचित किया कि भगोड़े आर्थिक अपराधियों (Fugitive Economic Offenders

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चर्चा में क्यों

वित्त मंत्रालय ने संसद को सूचित किया कि भगोड़े आर्थिक अपराधियों (Fugitive Economic Offenders - FEOs) पर भारतीय बैंकों का 58,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। यह जानकारी उन व्यक्तियों से संपत्ति वसूलने में आने वाली चुनौतियों को रेखांकित करती है जो देश छोड़कर भाग गए हैं।

पृष्ठभूमि

वित्त मंत्रालय ने रिपोर्ट दी है कि नौ FEOs बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी में शामिल हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने सबसे अधिक राशि वसूल की है, जो कुल राशि का 52% है, और यह मुख्य रूप से लिक्विडेशन (liquidation) प्रयासों के माध्यम से प्राप्त हुई है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यभगोड़े आर्थिक अपराधियों (Fugitive Economic Offenders - FEOs) द्वारा भारतीय बैंकों पर बकाया कुल राशि मूलधन और ब्याज मिलाकर ₹58,000 करोड़ से अधिक है।
  • तथ्यस्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने FEOs द्वारा बकाया कुल राशि का 52% वसूल कर लिया है।
  • पदवित्त मंत्रालय Fugitive Economic Offenders (FEOs) पर रिपोर्टिंग के लिए नोडल मंत्रालय है।
  • तथ्यसंदेसरा परिवार और नीरव मोदी को प्रमुख FEOs के रूप में पहचाना गया है, जिनकी रिकवरी रेट SBI की लिक्विडेशन सफलता की तुलना में कम है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भगोड़े आर्थिक अपराधियों (FEOs) से संपत्ति की वसूली में निहित संस्थागत और कानूनी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और वसूली ढांचे को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • क्षेत्राधिकार की बाधाएं: ऑफशोर टैक्स हेवन में मौजूद संपत्तियों पर ज़ब्ती और लिक्विडेशन ऑर्डर लागू करने में कठिनाई
  • लिक्विडेशन एफिशिएंसी: SBI के रिकवरी मॉडल की सफलता बनाम नीरव मोदी जैसे हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों के लिए कम रिकवरी रेट

मुख्य शब्द: भगोड़ा आर्थिक अपराधी · एसेट लिक्विडेशन · वित्तीय धोखाधड़ी · रिकवरी मैकेनिज्म · वित्त मंत्रालय

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · मनी लॉन्ड्रिंग एवं संगठित अपराध

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।