कर्नाटक सरकार ने महिलाओं, बच्चों और जनता की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर हेट स्पीच (hate speech)
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चर्चा में क्यों
कर्नाटक सरकार ने महिलाओं, बच्चों और जनता की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर हेट स्पीच (hate speech), गलत सूचना (misinformation) और दुर्भावनापूर्ण अभियानों की पहचान करने हेतु ₹67.26 करोड़ के AI-पावर्ड सॉफ्टवेयर को मंजूरी दी है।
पृष्ठभूमि
कर्नाटक सरकार द्वारा डीप फेक (deep fakes), बॉट नेटवर्क और बहुभाषी नैरेटिव्स (multi-language narratives) का पता लगाने के लिए इस सॉफ्टवेयर को तैनात किया जाएगा। इस परियोजना की लागत ₹67.26 करोड़ है और इसे मानवीय हस्तक्षेप या किसी भी राजनीतिक लाभ के बिना संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यकर्नाटक सरकार द्वारा स्वीकृत AI-पावर्ड सॉफ्टवेयर की लागत ₹67.26 करोड़ है।
- विज्ञान-तकनीकयह सॉफ्टवेयर deep fakes, bot networks और multi-language narratives की पहचान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- स्थानइस पहल को कर्नाटक राज्य कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एक लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं और घृणास्पद भाषण की निगरानी के लिए एआई-संचालित निगरानी (AI-powered surveillance) के उपयोग से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और नैतिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- प्राइवेसी-सिक्योरिटी ट्रेड-ऑफ: व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की आज़ादी और दुर्भावनापूर्ण अभियानों को रोकने के लिए राज्य के जनादेश के बीच संतुलन
- एल्गोरिथमिक बायस: ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर द्वारा सांस्कृतिक बारीकियों या अल्पसंख्यक दृष्टिकोण को हेट स्पीच के रूप में गलत पहचानने का जोखिम
- अकाउंटेबिलिटी गैप: यह सुनिश्चित करने में चुनौतियां कि 'कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं' से अपारदर्शी ऑटोमेटेड सेंसरशिप न हो जाए
मुख्य शब्द: एल्गोरिद्मिक गवर्नेंस · डिजिटल संप्रभुता · सूचना की सत्यता · निगरानी नैतिकता · डीपफेक्स
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।