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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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गृह मंत्रालय ने पुष्टि की है कि विभिन्न राज्यों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर, 2027 की जनगणना के दूसरे चरण में जाति से संबंधित प्रश्न शामिल किए जाएंगे

GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे)· प्रीलिम्स + मेन्स·

चर्चा में क्यों

गृह मंत्रालय ने पुष्टि की है कि विभिन्न राज्यों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर, 2027 की जनगणना के दूसरे चरण में जाति से संबंधित प्रश्न शामिल किए जाएंगे।

पृष्ठभूमि

2027 की जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी। पहले चरण के प्रश्नों को अधिसूचित कर दिया गया है, जबकि फरवरी 2027 से शुरू होने वाला दूसरा चरण जाति गणना सहित जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक जानकारी पर केंद्रित होगा।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्य2027 की जनगणना (Census) को दो अलग-अलग चरणों में आयोजित करने की योजना है।
  • तथ्यजनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होने वाला है।
  • संस्थागृह मंत्रालय (MHA) जनगणना (Census) आयोजित करने के लिए नोडल मंत्रालय है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में समावेशी सामाजिक न्याय की नीतियों के निर्माण हेतु राष्ट्रीय जनगणना में जातिगत डेटा को शामिल करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • डेटा-आधारित नीति: आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और लक्ष्य निर्धारण के लिए सटीक जाति गणना एक आधार
  • संघीय टकराव: राज्यों की बारीक जातिगत डेटा की मांग और राष्ट्रीय डेटा प्राइवेसी व प्रशासनिक व्यवहार्यता के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: जनसांख्यिकीय गणना · सामाजिक न्याय · डेटा-आधारित नीति · संघवाद · समावेशी विकास

पूरा कालक्रम (रिवीजन के लिए) →पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS1 · सामाजिक विविधता, जाति एवं जनजातियां

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।