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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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रोटारियंस, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यूनिपैड्स फाउंडेशन ने तेलंगाना में 60,000 छात्राओं को दोबारा इस्तेमाल होने वाले सैनिटरी पैड वितरित करने के लिए 'प्रोजेक्ट शक्ति' (Project Shakti) शुरू किया है

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चर्चा में क्यों

रोटारियंस, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यूनिपैड्स फाउंडेशन ने तेलंगाना में 60,000 छात्राओं को दोबारा इस्तेमाल होने वाले सैनिटरी पैड वितरित करने के लिए 'प्रोजेक्ट शक्ति' (Project Shakti) शुरू किया है।

पृष्ठभूमि

प्रोजेक्ट शक्ति के तहत तेलंगाना के 60,000 छात्रों को पुन: उपयोग योग्य सैनिटरी पैड किट प्रदान करने के लिए कुल ₹2.5 करोड़ का परिव्यय (outlay) निर्धारित किया गया है। प्रत्येक किट में तीन पैड शामिल हैं, जिन्हें 12 से 16 महीनों तक उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यप्रोजेक्ट शक्ति (Project Shakti) का लक्ष्य: तेलंगाना में 60,000 छात्राएं।
  • तथ्यप्रोजेक्ट शक्ति (Project Shakti) के लिए कुल परिव्यय: ₹2.5 करोड़।
  • तथ्यकिट संरचना: 12-16 महीने तक चलने वाले 3 रियूजेबल पैड्स (reusable pads)।
  • स्थानउद्घाटन स्थल: वीरनारी चकला इल्म्मा विमेंस यूनिवर्सिटी, तेलंगाना।

मेन्स के लिए

प्रश्न: ग्रामीण भारत में किशोरियों के बीच मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन और शैक्षिक प्रतिधारण (educational retention) को सुनिश्चित करने में 'प्रोजेक्ट शक्ति' जैसी पहल किस प्रकार सहायक हो सकती हैं, चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: ग्रामीण स्कूलों और यूनिवर्सिटीज में सुलभ सैनिटेशन सुविधाओं की कमी
  • आर्थिक बाधा: डिस्पोजेबल पैड्स की भारी लागत से कम आय वाली छात्राओं पर असर
  • व्यवहार में बदलाव: पर्यावरण कचरे को कम करने के लिए डिस्पोजेबल के बजाय दोबारा इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स अपनाना

मुख्य शब्द: मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन · लैंगिक समानता · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · शैक्षिक रिटेंशन · टिकाऊ स्वच्छता

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS2 · सरकारी नीतियां एवं योजनाएंयह भी: GS1 · महिलाएं एवं लैंगिक मुद्दे

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।