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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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कर्नाटक के ग्रामीण श्रमिकों ने प्रस्तावित 'विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन' (Viksit Bharat-Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission) ढांचे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया

GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे)· मेन्स·

चर्चा में क्यों

कर्नाटक के ग्रामीण श्रमिकों ने प्रस्तावित 'विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन' (Viksit Bharat-Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission) ढांचे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि यह ढांचा MGNREGA के अधिकार-आधारित स्वरूप को कमजोर करता है।

पृष्ठभूमि

कर्नाटक में प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि नया ढांचा MGNREGA की मांग-आधारित प्रकृति के लिए खतरा पैदा करता है। वे महिलाओं की आजीविका में सुधार और दलित समुदायों को सशक्त बनाने में इस योजना की भूमिका पर जोर देते हैं। साथ ही, वे पीक-सीजन (peak-season) रोजगार पर नई पाबंदियों और अत्यधिक डिजिटलीकरण की आलोचना भी कर रहे हैं।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • योजनाMGNREGA: एक अधिकार-आधारित, डिमांड-ड्रिवन (demand-driven) ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना।
  • तथ्यविकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन: MGNREGA को बदलने या उसमें संशोधन करने के लिए प्रस्तावित फ्रेमवर्क।
  • तथ्यविरोध का स्थान: कर्नाटक।

मेन्स के लिए

प्रश्न: महिला एवं दलित समुदायों के लिए सामाजिक न्याय के उपकरण के रूप में मनरेगा (MGNREGA) की प्रभावकारिता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और एक गैर-अधिकार-आधारित ढांचे की ओर संक्रमण के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • अधिकार-आधारित बनाम कल्याण-आधारित: कानूनी हक से विवेकाधीन रोजगार की ओर बदलाव से नौकरी की सुरक्षा पर असर
  • सामाजिक समावेश: ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं में पिछड़े वर्गों और महिलाओं के लिए सुरक्षा जाल के कम होने की संभावना
  • डिजिटल डिवाइड: ग्रामीण इलाकों में अत्यधिक डिजिटलीकरण के जोखिम जिससे कम साक्षर श्रमिकों के लिए पहुंच प्रभावित होती है

मुख्य शब्द: अधिकार-आधारित दृष्टिकोण · सामाजिक न्याय · आजीविका सुरक्षा · पिछड़ा वर्ग · डिमांड-ड्रिवन एम्प्लॉयमेंट

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS2 · सरकारी नीतियां एवं योजनाएंयह भी: GS1 · सामाजिक विविधता, जाति एवं जनजातियां

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।