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भाग I · स्था. 11.2025 
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने राज्य सरकारों और अधिकारियों को यमुना नदी में प्रदूषण और आक्रामक प्रजातियों (invasive species) से स्थानीय मछली की प्रजातियों की रक्षा के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए हैं

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चर्चा में क्यों

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने राज्य सरकारों और अधिकारियों को यमुना नदी में प्रदूषण और आक्रामक प्रजातियों (invasive species) से स्थानीय मछली की प्रजातियों की रक्षा के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

पृष्ठभूमि

NGT ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों को आदेश जारी किए हैं। ट्रिब्यूनल ने प्रदूषण नियंत्रण, रेत खनन के नियमन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (Sewage Treatment Plant) के कार्यान्वयन और थाई मंगुर (Thai Mangur) जैसी आक्रामक प्रजातियों पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थानेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal - NGT) पर्यावरणीय निर्देश जारी करने वाली प्राथमिक संस्था है।
  • पर्यावरणथाई मंगुर (Thai Mangur) को यमुना नदी में एक इनवेसिव स्पीशीज (invasive species) के रूप में पहचाना गया है।
  • तथ्यNGT का आदेश पांच विशिष्ट राज्यों को कवर करता है: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश।

मेन्स के लिए

प्रश्न: नदी जैव विविधता पर आक्रामक प्रजातियों के पारिस्थितिक प्रभाव की चर्चा कीजिए और नदी बहाली में न्यायिक हस्तक्षेप की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • पारिस्थितिक असंतुलन: इनवेसिव थाई मंगुर प्रजाति द्वारा स्थानीय मछली प्रजातियों का विस्थापन
  • रेगुलेटरी फ्रिक्शन: रेत खनन की आर्थिक गतिविधियों और नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन
  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता की कमी से नदियों के आवास खराब हो रहे हैं

मुख्य शब्द: आक्रामक प्रजातियां · नदी तटीय जैव विविधता · जुडिशियल एक्टिविज्म · पारिस्थितिक बहाली · प्रदूषण कम करना

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · प्रदूषण (वायु, जल, प्लास्टिक)

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।