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भाग I · स्था. 11.2025 
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पुस्तका माने लाइब्रेरी में दुर्लभ पांडुलिपियों और साहित्य के संरक्षण के प्रति जीवनभर के समर्पण के लिए अंके गौड़ा को पद्म श्री से सम्मानित किया गया

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चर्चा में क्यों

पुस्तका माने लाइब्रेरी में दुर्लभ पांडुलिपियों और साहित्य के संरक्षण के प्रति जीवनभर के समर्पण के लिए अंके गौड़ा को पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

पृष्ठभूमि

75 वर्षीय पुस्तक संग्राहक अंके गौड़ा ने हरलाहल्ली गांव में 'पुस्तका माने' की स्थापना की। इस पुस्तकालय में दुर्लभ पांडुलिपियों, धार्मिक ग्रंथों और ऐतिहासिक दस्तावेजों सहित 20 लाख से अधिक पुस्तकें मौजूद हैं।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • पदअंके गौड़ा: लाइब्रेरियनशिप (librarianship) के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म श्री 2026 के प्राप्तकर्ता।
  • स्थानपुस्तका माने: हरहल्ली गाँव में स्थित एक लाइब्रेरी, जिसमें 20 लाख से अधिक किताबें मौजूद हैं।
  • तथ्यइस संग्रह में दुर्लभ पांडुलिपियाँ (manuscripts) और महात्मा गांधी की कृतियाँ और भगवद गीता शामिल हैं।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की अमूर्त और मूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में निजी पहलों और समुदाय-आधारित पुस्तकालयों के महत्व की चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • प्रिजर्वेशन गैप: दुर्लभ पांडुलिपियों के निजी संग्रहकर्ताओं के लिए संस्थागत फंडिंग की कमी
  • कम्युनिटी एंगेजमेंट: क्षेत्रीय साहित्य और ऐतिहासिक साक्षरता को बढ़ावा देने में ग्रासरूट लाइब्रेरी की भूमिका

मुख्य शब्द: सांस्कृतिक संरक्षण · जमीनी स्तर की पहल · हेरिटेज कंजर्वेशन · साहित्यिक विविधता

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।