भारत में प्रदूषण कम करने के लिए डॉ. साधना रायालु ने बनाए ग्रीन क्रैकर्स
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चर्चा में क्यों
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के वैज्ञानिकों ने वायु प्रदूषण के उत्सर्जन को काफी हद तक कम करने के लिए दूसरी पीढ़ी के ग्रीन क्रैकर्स (Green Crackers) विकसित किए हैं।
पृष्ठभूमि
डॉ. साधना रायालु और CSIR के वैज्ञानिकों ने डॉ. हर्ष वर्धन द्वारा 2017 में दी गई एक चुनौती के बाद ग्रीन क्रैकर्स (Green Crackers) विकसित किए। जहाँ पहली पीढ़ी के पटाखों ने पार्टिकुलेट मैटर (Particulate Matter) को 30% तक कम किया था, वहीं नए दूसरी पीढ़ी के फॉर्मूलेशन 45 से 60 प्रतिशत तक उत्सर्जन में कमी लाते हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाCSIR: काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च।
- तथ्यसेकंड-जनरेशन ग्रीन क्रैकर्स (Green Crackers) उत्सर्जन में 45 से 60 प्रतिशत की कमी लाते हैं।
- तथ्यफर्स्ट-जनरेशन ग्रीन क्रैकर्स (First-generation green crackers) ने पार्टिकुलेट मैटर (particulate matter) को लगभग 30 प्रतिशत कम कर दिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शहरी वायु प्रदूषण को कम करने और भारत के पर्यावरणीय स्थिरता लक्ष्यों को प्राप्त करने में स्वदेशी तकनीकी नवाचारों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- तकनीकी प्रभावशीलता: सेकंड-जनरेशन फॉर्मुलेशन के जरिए पार्टिकुलेट मैटर में 30% से 60% की कमी
- संस्थागत तालमेल: वैज्ञानिक रिसर्च को जनता के अनुकूल पर्यावरणीय समाधानों में बदलने में CSIR की भूमिका
मुख्य शब्द: पार्टिकुलेट मैटर · ग्रीन क्रैकर्स · उत्सर्जन में कमी · CSIR · पर्यावरण सुधार
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।