सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को पिछले पांच वर्षों में आवारा पशु नियंत्रण के नियमों को लागू करने में विफलता के कारण
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को पिछले पांच वर्षों में आवारा पशु नियंत्रण के नियमों को लागू करने में विफलता के कारण, कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए भारी मुआवजा देने का आदेश दिया है।
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच के साथ यह फैसला सुनाया कि डॉग-बाइट (कुत्ते के काटने) के मामलों में मुआवजे के लिए राज्य सरकारें जिम्मेदार होंगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आवारा जानवरों से जुड़ी घटनाओं के लिए डॉग लवर्स और उन्हें खाना खिलाने वाले लोग जवाबदेह होंगे।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यकोर्ट ने पांच साल की अवधि के दौरान आवारा पशु नियंत्रण मानदंडों (stray animal control norms) के कार्यान्वयन की कमी का हवाला दिया।
- पदजस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता: फैसले की अध्यक्षता करने वाले जज।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शहरी क्षेत्रों में आवारा पशुओं की आबादी के प्रबंधन में आने वाली चुनौतियों और पशु-संबंधित सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी मुद्दों के लिए व्यक्तियों एवं राज्यों की जवाबदेही तय करने के कानूनी निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- रेगुलेटरी गैप: आवारा पशु नियंत्रण मानकों के लिए राज्य स्तर पर मानकीकृत प्रवर्तन की कमी
- लायबिलिटी का टकराव: पशु खिलाने वालों के व्यक्तिगत अधिकारों और सार्वजनिक सुरक्षा व जीवन के अधिकार के बीच संतुलन
- प्रशासनिक बाधा: पशु आश्रय और नसबंदी के लिए नगर निगम का बुनियादी ढांचा अपर्याप्त
मुख्य शब्द: सार्वजनिक सुरक्षा · नगर निगम शासन · दायित्व · पशु कल्याण · न्यायिक सक्रियता
सामाजिक न्याय पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।