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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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भारत में गरीबी दर में भारी गिरावट, 57.7% से घटकर 16.1% हुई

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· रोज़गार एवं समावेशी विकास· प्रीलिम्स + मेन्स·

निर्धनता की गतिशीलता और श्रम बल के रुझान: आय की असमानता पर GS3 अर्थव्यवस्था से संबंधित एक प्रमुख केस स्टडी।

चर्चा में क्यों

वर्ल्ड बैंक ने रिपोर्ट में बताया है कि $4.20 प्रतिदिन से कम वाली गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले भारतीयों की संख्या में महत्वपूर्ण गिरावट आई है, जो भारत की गरीबी की स्थिति में आए बदलाव को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

$4.20 प्रति दिन की गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की हिस्सेदारी 2011-12 में 57.7% से घटकर 2023-24 में 16.1% रह गई है। वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि यह आंकड़ा 2028 तक घटकर 12.1% तक पहुंच जाएगा।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • रिपोर्ट / सूचकांकवर्ल्ड बैंक की 'Poverty and Equity Brief: India' (अक्टूबर 2026) ने गरीबी रेखा के आंकड़े रिपोर्ट किए।
  • तथ्यभारत का वर्कर-पॉपुलेशन रेशियो (worker-population ratio) 2017-18 में 46.8% से बढ़कर 2023-24 में 58.2% हो गया।
  • तथ्यमहंगाई के साथ समायोजित (Inflation-adjusted) नियमित वेतनभोगी श्रमिकों की दैनिक कमाई 2017-18 और 2023-24 के बीच 381 रुपये पर स्थिर रही।
  • तथ्यकैजुअल वर्कर्स (Casual workers) की दैनिक कमाई 2017-18 और 2023-24 के बीच 189 रुपये से बढ़कर 227 रुपये हो गई।
  • संस्थाPeriodic Labour Force Survey (PLFS) जुलाई से जून तक की अवधि को कवर करता है।

प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न

भारत की गरीबी और श्रम गतिशीलता (labor dynamics) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 2023-24 में $4.20-प्रति-दिन की गरीबी रेखा (poverty line) से नीचे रहने वाले भारतीयों की हिस्सेदारी घटकर 16.1% रह गई।
  2. महंगाई के हिसाब से नियमित वेतनभोगी श्रमिकों की दैनिक कमाई 2017-18 और 2023-24 के बीच बढ़कर 500 रुपये हो गई।
  3. 2023-24 में भारत का वर्कर-पॉपुलेशन रेशियो (worker-population ratio) बढ़कर 58.2% हो गया।
  1. (a)केवल 1
  2. (b)केवल 3
  3. (c)केवल 1 और 2
  4. (d)केवल 1 और 3
उत्तर देखें

उत्तर: (d) केवल 1 और 3 — कथन 1 और 3 सही हैं। कथन 2 गलत है: कमाई (Earnings) 381 रुपये पर अपरिवर्तित रही।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में रोजगार के बढ़ते आंकड़ों और विभिन्न श्रमिक श्रेणियों के बीच असमान वास्तविक वेतन वृद्धि के अंतर्संबंधों के संदर्भ में गरीबी उन्मूलन की जटिलताओं का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • मजदूरी में ठहराव: वर्कर-पॉपुलेशन रेशियो बढ़ने के बावजूद नियमित वेतनभोगी कर्मचारियों की महंगाई-समायोजित कमाई स्थिर
  • लेबर हेट्रोजेनिटी: खुद के मालिक (हल्की गिरावट) और कैजुअल वर्कर्स (बढ़त) के बीच अलग-अलग वेज ट्रेंड्स
  • घर की गतिशीलता: व्यक्तिगत वेतन वृद्धि बनाम वर्कफोर्स में शामिल होने वाले परिवार के सदस्यों की बढ़ती संख्या से गरीबी में कमी

मुख्य शब्द: गरीबी उन्मूलन · श्रमिक-आबादी अनुपात · वास्तविक वेतन · लेबर फोर्स की गतिशीलता · आयनी असमानता

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: एनडीटीवी ↗यह भी: GS2 · गरीबी, भूख एवं पोषण

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।