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भाग I · स्था. 11.2025 
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RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.5% किया, लोन महंगे हो सकते हैं

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· Monetary policy, RBI & banking· Prelims + Mains·

चर्चा में क्यों

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मुद्रास्फीति के दबाव और कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों से निपटने के लिए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया है।

पृष्ठभूमि

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति (Monetary Policy) में 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (calibrated tightening) की घोषणा की है। रेपो रेट (Repo Rate) में बढ़ोतरी से ऋण की लागत बढ़ने और आवासीय रियल एस्टेट सेक्टर पर इसके प्रभाव पड़ने की संभावना है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यरेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गया।

मेन्स के लिए

Q. उच्च महंगाई और कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों का सामना कर रहे एक अर्थव्यवस्था में, रेपो रेट में वृद्धि का आवासीय रियल एस्टेट क्षेत्र और निजी उपभोग पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • Transmission lag: Time gap between repo rate hikes and actual lending rate adjustments by commercial banks
  • Cost of borrowing: Increased interest outgo for home-buyers leading to potential slowdown in real estate demand
  • Inflation-Growth trade-off: Balancing price stability against the risk of cooling down industrial and private investment

कीवर्ड: Monetary Policy · Repo Rate · Inflationary Pressure · Calibrated Tightening · Liquidity Management

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: NDTV ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।