शिक्षा मंत्रालय ने क्लासिकल असमिया, बंगाली और पाली के लिए 5 सेंटर मंजूर किए
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चर्चा में क्यों
शिक्षा मंत्रालय ने शास्त्रीय असमिया, बंगाली, पाली, मराठी और प्राकृत भाषाओं के अनुसंधान, डिजिटलीकरण और संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए पांच 'सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस' (Centres of Excellence) को स्वीकृति प्रदान की है।
पृष्ठभूमि
शिक्षा मंत्रालय ने पांच विशिष्ट संस्थानों को स्वीकृति प्रदान की है: तेजपुर विश्वविद्यालय, विश्वभारती विश्वविद्यालय, केंद्रीय ओडिशा विश्वविद्यालय, केंद्रीय गुजरात विश्वविद्यालय और डेक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट। यह पहल भाषाई विरासत के संरक्षण और डिजिटलीकरण पर केंद्रित है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाTezpur University, Visva Bharati University, Central University of Odisha, Central University of Gujarat, और Deccan College Post Graduate and Research Institute नामित केंद्र हैं।
- तथ्ययह पहल पांच विशिष्ट भाषाओं को कवर करती है: Classical Assamese, Bengali, Pali, Marathi, और Prakrit।
- पदइस पहल की मोहन चरण माझी द्वारा प्रशंसा की गई।
मेन्स के लिए
Q. तीव्र तकनीकी प्रगति के युग में भारत की भाषाई विरासत के संरक्षण और डिजिटलीकरण में 'उत्कृष्टता केंद्र' (Centres of Excellence) की स्थापना के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Digital preservation: Mitigating the risk of linguistic erosion through systematic digitisation of ancient manuscripts
- Academic research: Strengthening the scholarly framework for classical languages to support multi-disciplinary heritage studies
कीवर्ड: Linguistic heritage · Digitisation · Cultural preservation · Research infrastructure · Classical languages
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।