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अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना बनाम नियामक निरीक्षण: GS3 पर्यावरण और शासन के अंतर्गत एक केस स्टडी।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की दक्षिणी पीठ ने पड़ोसी राज्यों में अवैध डंपिंग की रिपोर्टों के बाद, केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) द्वारा पर्याप्त जैव-चिकित्सा अपशिष्ट (biomedical waste) क्षमता के दावे पर प्रश्न उठाए हैं।
वर्ष 2025 में, केरल में प्रतिदिन लगभग 73.08 टन जैव-चिकित्सा अपशिष्ट (biomedical waste) उत्पन्न हुआ, जबकि इसकी स्थापित उपचार क्षमता 71.8 टन प्रति दिन थी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने यह संज्ञान लिया कि अपशिष्ट प्रबंधन प्राधिकरण हेतु 642 आवेदन लंबित थे और 73 आवेदनों को स्पष्टीकरण हेतु वापस कर दिया गया था।
केरल में जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन (biomedical waste management) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उत्तर: (d) केवल 2 और 3 — कथन 2 और 3 सही हैं। कथन 1 गलत है: स्थापित उपचार क्षमता 71.8 टन प्रति दिन है।
Q. भारत में जैव-चिकित्सा अपशिष्ट (biomedical waste) के प्रबंधन में निहित संस्थागत और ढांचागत चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए तथा पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
उत्तर के आयाम
कीवर्ड: Environmental Compliance · Waste Management · Regulatory Oversight · Pollution Control · Inter-state Environmental Governance
यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।