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भाग I · स्था. 11.2025 
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त्रिपुरा में 19 अवैध रिहैब सेंटर बंद होने की कगार पर, हिंसा के बाद एक्शन

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मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं का नियामक निरीक्षण: GS2 सामाजिक न्याय और सार्वजनिक स्वास्थ्य शासन का एक केस स्टडी।

चर्चा में क्यों

अगतला स्थित एक केंद्र में हिंसा की घटनाओं की सूचना के बाद, त्रिपुरा सरकार ने 19 अवैध नशा मुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।

पृष्ठभूमि

राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण ने त्रिपुरा में अपर्याप्त बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की कमी के कारण बंद किए जाने हेतु 19 अपंजीकृत सुविधाओं की पहचान की है। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम के अंतर्गत, संचालकों को एक सप्ताह के भीतर कारण बताओ नोटिस का उत्तर देना अनिवार्य है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाराज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण: त्रिपुरा में मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की देखरेख के लिए जिम्मेदार निकाय।
  • अधिनियम / विधेयकमानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (Mental Health Care Act): पुनर्वास केंद्रों के संचालन और मानकों को नियंत्रित करने वाला विधान।
  • तथ्यबंद करने के लिए 19 अवैध नशामुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास केंद्रों की पहचान की गई।
  • स्थानअगरतला: वह केंद्र जहाँ हाल ही में हिंसा हुई।

प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न

त्रिपुरा में मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास केंद्रों के विनियमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (Mental Health Care Act) इन पुनर्वास केंद्रों के संचालन और मानकों को नियंत्रित करता है।
  2. राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (State Mental Health Authority) मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की देखरेख के लिए जिम्मेदार निकाय है।
  3. बुनियादी ढांचे के उल्लंघन के कारण बंद करने के लिए कुल 25 अपंजीकृत सुविधाओं की पहचान की गई।
  1. (a)केवल 1
  2. (b)केवल 1 और 2
  3. (c)केवल 1 और 3
  4. (d)1, 2 और 3
उत्तर देखें

उत्तर: (b) केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है: नोट में 25 के बजाय 19 अवैध केंद्रों की पहचान की गई है।

मेन्स के लिए

Q. निजी मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास केंद्रों की निगरानी में आने वाली विनियामक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और रोगी सुरक्षा एवं बुनियादी ढाँचे के मानकों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • Regulatory oversight: Lack of real-time monitoring of private facilities leads to infrastructure and staffing violations
  • Safety protocols: Absence of standardized violence-prevention measures in unregistered de-addiction centers
  • Legal enforcement: Delays in identifying and shutting down non-compliant facilities under the Mental Health Care Act

कीवर्ड: Regulatory oversight · Mental health infrastructure · Patient safety · Statutory compliance · Public health governance

पूरी खबर पढ़ें →स्रोत: The Hindu ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।