वर्कर्स के विरोध से रुका RINL का प्राइवेटाइजेशन, सुरक्षा पर खतरा
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चर्चा में क्यों
राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) का निजीकरण श्रमिकों के विरोध और CISF कर्मियों की वापसी से संबंधित सुरक्षा चिंताओं के कारण बाधाओं का सामना कर रहा है।
पृष्ठभूमि
कैबिनेट समिति (आर्थिक मामले) ने जनवरी 2021 में RINL की 100% रणनीतिक बिक्री को मंजूरी प्रदान की थी। ₹11,440 करोड़ के पुनरुद्धार पैकेज के बावजूद, कंपनी अत्यधिक ऋण और कच्चे माल की उच्च लागत जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। गृह मंत्रालय ने वित्तीय संकट के कारण 17 नवंबर, 2026 तक CISF की विमुक्ति (disengagement) को मंजूरी दे दी है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाRINL (Rashtriya Ispat Nigam Limited) इस्पात मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
- तथ्यRINL को वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए ₹11,440 करोड़ का पुनरुद्धार पैकेज आवंटित किया गया।
- संस्थाCISF (Central Industrial Security Force) गृह मंत्रालय के अधीन एक संघीय अर्धसैनिक बल है।
- तथ्यCabinet Committee on Economic Affairs (CCEA) सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी देने वाली सर्वोच्च संस्था है।
मेन्स के लिए
Q. विनिर्माण क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के निजीकरण से जुड़ी चुनौतियों, विशेष रूप से श्रम अधिकारों और औद्योगिक सुरक्षा के संदर्भ में, चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- labor unrest and trade union resistance
- security risks of private vs. statutory security
- fiscal viability of distressed assets
- way forward: balanced disinvestment policy
कीवर्ड: Strategic Sale · Disinvestment · Industrial Security · Labor Relations · Fiscal Distress
अर्थव्यवस्था पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।