सत्याधीशसत्याधीश
SatyaDheesh
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
ताज़ा करने के लिए खींचें
भाग I · स्था. 11.2025 
SatyaDheesh
सत्याधीश
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
लाइव

तमिलनाडु वन विभाग बाघों की आबादी और उनके शिकार के आधार (prey bases) का आकलन करने के लिए 'ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन' (AITE) 2026 के पहले चरण की शुरुआत करने जा रहा है

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· प्रजातियां, संरक्षित क्षेत्र एवं आर्द्रभूमि· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

तमिलनाडु वन विभाग बाघों की आबादी और उनके शिकार के आधार (prey bases) का आकलन करने के लिए 'ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन' (AITE) 2026 के पहले चरण की शुरुआत करने जा रहा है।

पृष्ठभूमि

AITE 2026 एक राष्ट्रव्यापी अभ्यास है, जिसे नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित किया जाता है। इसमें कैमरा ट्रैप और M-STrIPES मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग करके बाघों की आबादी और गौर, सांभर, चित (spotted deer) और बार्किंग डियर जैसी शिकार प्रजातियों का आकलन किया जाता है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थानेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA): यह संस्था ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन (AITE) अभ्यास के लिए जिम्मेदार है।
  • विज्ञान-तकनीकM-STrIPES: बाघों की आबादी और उनके आवास (habitat) के आकलन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक मॉनिटरिंग सिस्टम।
  • पर्यावरणअनुमान में पहचाने गए Prey base species में गौर, सांभर डियर, स्पॉटेड डियर और बार्किंग डियर शामिल हैं।
  • तथ्यAITE 2026 अभ्यास 5 जनवरी से शुरू होगा और फरवरी के अंत तक सात-दिन के चक्रों (cycles) में जारी रहेगा।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में बाघ संरक्षण रणनीतियों की प्रभावकारिता सुनिश्चित करने में एम-स्ट्राइप्स (M-STrIPES) जैसी प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी प्रणालियों के महत्व की चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • डेटा इंटीग्रिटी: अलग-अलग राज्य वन विभागों में स्टैंडर्ड रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना
  • हैबिटेट कनेक्टिविटी: बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष ज़ोन के साथ शिकार आधार की ज़रूरतों में संतुलन
  • तकनीकी बाधाएं: घने जंगल वाले इलाकों में कैमरा ट्रैप नेटवर्क को बनाए रखने की भारी लागत

मुख्य शब्द: जैव विविधता संरक्षण · आवास मूल्यांकन · वन्यजीव निगरानी · शिकार आधार गतिशीलता · तकनीक आधारित संरक्षण

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंग

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी पर और नोट्स

सभी पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी करेंट अफेयर्स →

कोई गलती या कोई कमी?

किसी नोट में गलती दिखे, या तैयारी के लिए कोई टॉपिक, फॉर्मेट या पीडीएफ चाहिए, तो हमें लिखें। हम हर मेल पढ़ते हैं और गलतियाँ जल्दी ठीक करते हैं।

गलती बताएँ →कुछ और चाहिए? बताएँ →[email protected]

यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।