भारतीय रिसर्चर्स ने सूरज के खतरनाक विस्फोटों को बताने के लिए 3D मॉडल बनाया
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चर्चा में क्यों
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के शोधकर्ताओं ने उपग्रह बुनियादी ढांचे और पावर ग्रिड की सुरक्षा हेतु 'कोरोनल मास इजेक्शन' (CMEs) का पूर्वानुमान लगाने के लिए एक 3D सिमुलेशन मॉडल विकसित किया है।
पृष्ठभूमि
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) ने एक 3D कंप्यूटर सिमुलेशन मॉडल विकसित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग किया है। यह मॉडल चुंबकीय फ्लक्स रोप के संचय और ऊर्जा उत्सर्जन का विश्लेषण करता है, जिसे NASA के HMI और AIA उपकरणों के डेटा का उपयोग करके सत्यापित किया गया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- विज्ञान-तकनीकCMEs (Coronal Mass Ejections) सूर्य के कोरोना से निकलने वाले चुंबकीय प्लाज्मा के विस्फोट हैं।
- संस्थाभारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) भारत में एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है।
- विज्ञान-तकनीकNASA के HMI (Helioseismic and Magnetic Imager) और AIA (Atmospheric Imaging Assembly) सौर अवलोकन के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण हैं।
- तथ्ययह अध्ययन 16 अगस्त, 2026 को प्रकाशित किया गया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आधुनिक युग में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और उपग्रह संचार प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अंतरिक्ष मौसम की निगरानी के महत्व पर चर्चा कीजिए।
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