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भाग I · स्था. 11.2025 
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Skyroot का Vikram-1 ऑर्बिट में सफल, लेकिन इन-हाउस SCOPE सैटेलाइट की टेलीमेट्री फेल

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· Space technology (ISRO, missions)· Prelims·

चर्चा में क्यों

Skyroot Aerospace ने सफलतापूर्वक अपने विक्रम-1 रॉकेट को कक्षा में प्रक्षेपित किया, किंतु इसके SCOPE उपग्रह के साथ टेलीमेट्री विफलताओं का सामना करना पड़ा, जो भारत में निजी अंतरिक्ष अन्वेषण की जटिलताओं को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि

Skyroot Aerospace ने 18 जुलाई, 2026 को अपने 'विक्रम-1' का प्रथम कक्षीय प्रक्षेपण सफलतापूर्वक संपन्न किया। कंपनी ने HEX20 के साथ एक बहु-प्रक्षेपण समझौता (multi-launch agreement) प्राप्त किया है, जिसके अंतर्गत 2027 के उत्तरार्ध से तीन समर्पित प्रक्षेपणों का संचालन किया जाएगा।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • विज्ञान-तकनीकSkyroot Aerospace: एक निजी भारतीय स्पेस-टेक कंपनी।
  • तथ्यVikram-1: Skyroot Aerospace का पहला कक्षीय प्रक्षेपण यान (orbital launch vehicle)।
  • विज्ञान-तकनीकटेलीमेट्री (Telemetry): एक अंतरिक्ष यान से ग्राउंड स्टेशन तक डेटा का स्वचालित प्रसारण।

मेन्स के लिए

Q. भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की भागीदारी की भूमिका और वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • In-Space Technology (ISRO's role)
  • Private Sector Growth
  • Risk Management in Spaceflight

कीवर्ड: Space Economy · Private Participation · Telemetry · Orbital Mechanics · Technological Complexity

पूरी खबर पढ़ें →स्रोत: NDTV ↗यह भी: GS3 · Industry, investment & MSMEs

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।