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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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आंध्र प्रदेश ने हाई-राइज स्लम रिडेवलपमेंट को दी मंजूरी, वेलांपेटा में 177 यूनिट्स से शुरुआत

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· भूमि सुधार· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

आंध्र प्रदेश सरकार ने विशाखापट्टनम में इन-सिटू आवास की सुविधा हेतु DBFT दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए एक उच्च-स्तरीय झुग्गी पुनर्विकास मॉडल को मंजूरी दी है।

पृष्ठभूमि

इस परियोजना के अंतर्गत विशाखापट्टनम के वेलमपेटा में 177 आवास इकाइयों का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है, जिसमें भवनों की ऊंचाई 45 मीटर तक होगी। इस परियोजना के क्रियान्वयन हेतु 'डिज़ाइन, बिल्ड, फाइनेंस, एंड ट्रांसफर' (DBFT) मॉडल और 1:4 के 'ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स' (TDR) अनुपात का उपयोग किया जाएगा।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यवेलमपेटा में पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत 177 आवास इकाइयों का निर्माण शामिल है।
  • विज्ञान-तकनीकपुनर्विकास मॉडल 45 मीटर तक ऊंची बहुमंजिला इमारतों के निर्माण का उपयोग करता है।
  • तथ्ययह परियोजना 1:4 के Transferable Development Rights (TDR) अनुपात का उपयोग करती है।
  • तथ्यDBFT (Design, Build, Finance, and Transfer) दृष्टिकोण पुनर्विकास के लिए प्राथमिक मॉडल है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: तेजी से शहरीकरण की ओर अग्रसर भारतीय शहरों में 'इन-सिटू' (स्थान-पर) झुग्गी पुनर्विकास मॉडल की चुनौतियों और लाभों का विश्लेषण कीजिए। टीडीआर (TDR) और डीबीटीएफटी (DBFT) मॉडल इन चुनौतियों का समाधान किस प्रकार कर सकते हैं? चर्चा कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: एनडीटीवी ↗यह भी: GS1 · शहरीकरण

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।