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भाग I · स्था. 11.2025 
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केरल राज्य औषधि नियंत्रण विभाग उपभोक्ता को भ्रमित होने से बचाने और दवाओं की गुणवत्ता सुनिश

GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्य· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

केरल राज्य औषधि नियंत्रण विभाग उपभोक्ता को भ्रमित होने से बचाने और दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भ्रामक छूट वाले बोर्ड प्रदर्शित करने वाले फार्मेसियों की जाँच कर रहा है।

पृष्ठभूमि

केरल उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुपालन में, केरल राज्य औषधि नियंत्रण विभाग ने 17 जुलाई को एक परिपत्र जारी किया। यह जाँच 'ऑल-केरल केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन' (AKCDA) द्वारा अस्पष्ट मूल्य दावों और संभावित गुणवत्ता संबंधी समस्याओं के संबंध में दर्ज की गई शिकायत के आधार पर शुरू की गई थी।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाकेरल राज्य औषधि नियंत्रण विभाग (Drugs Control department) राज्य में फार्मास्युटिकल बिक्री के लिए नियामक निकाय है।
  • तथ्यजांच का मुख्य केंद्र फार्मेसियों द्वारा लगाए गए 'भ्रामक छूट बोर्ड' और 'अस्पष्ट मूल्य दावे' हैं।
  • स्थानअलापुझा वह जिला है जहाँ ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा प्रारंभिक जांच शुरू की गई थी।

मेन्स के लिए

प्रश्न: उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने और अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने के लिए औषधि क्षेत्र में विनियामक निरीक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: द हिंदू ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।