RBI के नए नियम: बैंकों को अब विदेशी ट्रांजेक्शन की जांच करनी होगी
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चर्चा में क्यों
RBI विदेशी लेनदेन और सेवा अनुबंधों की सत्यता की पुष्टि करने के लिए बैंकों हेतु नए नियम लागू कर रहा है, ताकि नियामक मध्यस्थता (regulatory arbitrage) और धन शोधन (money laundering) पर अंकुश लगाया जा सके।
पृष्ठभूमि
1 अक्टूबर से प्रभावी, बैंकों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे पूर्व-निर्धारित सतर्कता सूची (caution list) के बिना सेवा अनुबंधों का मूल्यांकन करें और निर्यात प्राप्तियों को प्रमाणित करें। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य लेनदेन की वैधता की पुष्टि करने की जिम्मेदारी RBI से हटाकर बैंकिंग संस्थानों पर स्थानांतरित करना है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाRBI: भारत का केंद्रीय बैंक जो बैंकिंग प्रणाली और मौद्रिक नीति (monetary policy) को विनियमित करने के लिए उत्तरदायी है।
- संस्थाED: प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) धन शोधन (money laundering) और विदेशी मुद्रा उल्लंघन की जांच करने वाली प्राथमिक एजेंसी है।
- तथ्यनए नियम बैंकों के लिए सेवा ट्रैकिंग और कर घोषणाओं के बीच निरंतरता सुनिश्चित करना अनिवार्य बनाते हैं।
मेन्स के लिए
Q. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी लेनदेन के लिए लागू किए गए नए सत्यापन मानदंडों के कार्यान्वयन में बैंकिंग क्षेत्र के समक्ष आने वाली चुनौतियों और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) को रोकने में उनकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- regulatory arbitrage risks
- compliance costs for banks
- impact on ease of doing business
- strengthening AML (Anti-Money Laundering) framework
कीवर्ड: regulatory arbitrage · money laundering · compliance · transparency · financial oversight
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।